रायपुर: छत्तीसगढ़ सरकार की इजराइल में नर्सिंग स्नातकों की भर्ती अब विवादों के घेरे में आ गई है. राजभवन ने शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए इस पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं. गृह-आधारित केयरगिवर (Home-Based Caregiver) के नाम पर योग्य नर्सों को घरेलू कामों (Cooking, Cleaning, Washing) में लगाए जाने का आरोप लग रहा है.
क्या है पूरा मामला?
भारत-इजराइल लेबर मोबिलिटी एग्रीमेंट के तहत छत्तीसगढ़ नर्सेस रजिस्ट्रेशन काउंसिल ने 11 जून को सर्कुलर जारी कर GNM और BSc नर्सिंग पास युवतियों-युवकों से आवेदन मांगे थे. इन पदों पर सैलरी 2 लाख रुपए प्रतिमाह तक, मुफ्त आवास, भोजन और मेडिकल इंश्योरेंस का लालच दिया गया था. केंद्र सरकार के स्किल डेवलपमेंट मंत्रालय ने राज्यों से 3500 ऐसे केयरगिवर भेजने को कहा था.
नर्सिंग एसोसिएशन और डॉक्टर्स का कहना है कि नर्सिंग एक प्रोफेशनल हेल्थकेयर डिग्री है. इसे घरेलू नौकरियों के लिए इस्तेमाल करना नर्सिंग पेशे की गरिमा को ठेस पहुंचाता है. छत्तीसगढ़ नर्सिंग एसोसिएशन के महासचिव अमित रॉय ने कहा कि अगर विदेश में अवसर चाहिए तो नर्स के रूप में भर्ती करवाएं, न कि घरेलू काम करने वाले केयरगिवर के रूप में.
सुरक्षा की भी चिंता
इजराइल में चल रहे सशस्त्र संघर्ष को देखते हुए नर्सों की सुरक्षा, इंश्योरेंस, इवैक्यूएशन प्लान और कानूनी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस मेडिकल सेल के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता की शिकायत पर राजभवन ने स्वास्थ्य विभाग को जांच सौंपी है. अब मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर को विस्तृत रिपोर्ट जमा करने के निर्देश दिए गए हैं.
नर्सिंग समुदाय के कई सदस्यों ने इस भर्ती का विरोध किया है. वहीं, समर्थकों का तर्क है कि यह द्विपक्षीय समझौते के तहत अच्छा विदेशी रोजगार अवसर है. जांच रिपोर्ट आने के बाद तय होगा कि भर्ती प्रक्रिया उसी रूप में आगे बढ़ेगी या उसमें बदलाव किया जाएगा. फिलहाल पूरा मामला छत्तीसगढ़ की नर्सिंग बहनों के भविष्य और पेशेवर गरिमा को लेकर चर्चा का विषय बन गया है.