पढ़िए अमित शाह की वो 5 रणनीति, जिसने टीएमसी का ढहाया किला...

Abhishek Chaturvedi 05 May 2026 04:18: PM 3 Mins
पढ़िए अमित शाह की वो 5 रणनीति, जिसने टीएमसी का ढहाया किला...

Amit Shah Strategy for Bengal: बिहार हो या बंगाल, अमित शाह जहां कदम रख देते हैं, वहां कमल जरूर खिलता है, पर कैसे...इसकी कहानी हर राज्य में बदल जाती है, आज जब बंगाल में टीएमसी की 15 साल की सत्ता बीजेपी ने उखाड़ फेंकी, तो सवाल यही उठ रहा है कि आखिर ये हुआ कैसे, तो इसे समझने के लिए शाह की 5 रणनीतियों को समझना होगा, जिसने बंगाल में टीएमसी के हाथों न सिर्फ सत्ता छीन ली, बल्कि अगले कई साल के लिए उसे विपक्ष में बिठा दिया है...

शाह की 5 नीति, TMC की सत्ता से छुट्टी

  • पहली- साल 2021 में जो गलतियां हुई, उसे सुधारा, करीब 40 हजार बूथ एजेंट्स नियुक्त किए, ताकि कोई भी बूथ खाली न रहे.
  • दूसरी- पन्ना प्रमुख मॉडल को प्राथमिकता के तहत लागू किया, हर कार्यकर्ता को 50-60 वोटर्स की जिम्मेदारी सौंपी, जबकि हर बूथ पर 8-10 वोट बढ़ाने का लक्ष्य कार्यकर्ताओं को दिया.
  • तीसरी- मतुआ समुदाय को लेकर शाह ने बड़ा वादा किया, महिलाओं को 3000 रुपये महीना देने और महिला सुरक्षा का वादा किया.
  • चौथी- टीएमसी को न सिर्फ घुसपैठिया विरोधी बताया, बल्कि ये वादा भी किया कि बीजेपी की सरकार आने के 45 दिन के भीतर बॉर्डर पर फेंसिंग के लिए जमीन दी जाएगी.
  • पांचवीं- टीएमसी के गुंडो की सीधा चेतावनी दी, उन्हें उल्टा लटकाने से लेकर चुनावी धांधली रोकने तक पर सख्ती दिखाई, वोटर्स का डर बयानों से दूर किया.

इसके अलावा कमल मेला, फुटबॉल मैच और 1 लाख बैठकों से बीजेपी ने ऐसा खेला किया कि टीएमसी को ये पता ही नहीं चला कि उसका कोर वोटबैंक इस बार भारी मात्रा में बीजेपी की ओर शिफ्ट हो रहा है...वरना सोचिए जो बीजेपी साल 2016 के चुनाव में सिर्फ 3 सीटें जीत पाई थी, साल 2021 में जिसने 77 सीटों पर जीत हासिल की थी, वो 2026 में टीएमसी को इतनी बुरी हार कैसे दिला पाती..और ये सब हुआ है शाह की उस सीक्रेट रणनीति से, जो उन्होंने 15 दिन तक बंगाल में डेरा डाले रखकर बनाई, रात करीब 2 बजे तक वो मीटिंग करते रहे, हर क्षेत्र के नेता से सीधा संपर्क किया.

बीजेपी के बड़े-बड़े नेताओं की ड्यूटी डोर टू डोर कैंपेन में लगाई गई, लाखों घरों तक बीजेपी के नेता खुद पहुंचकर वोटर्स को समझाते नजर आए, क्योंकि इस बार बीजेपी को पता था कि ममता को हराना है तो ग्राउंड लेवल पर खुद को मजबूत करना होगा..पार्टी में जो अंदरुनी तनातनी की ख़बरें हैं, उन्हें सुलझाना होगा, और शाह ने ये काम बखूबी निभाया भी...वरना दिलीप घोष और सुवेंदु अधिकारी के बीच कैसी तनातनी होती थी, ये सब जानते हैं...ये बात शाह को भी पता थी कि 15 साल से सत्ता में बरकरार ममता बनर्जी के खिलाफ जनता में नाराजगी है, एंटी इनकंबेंसी फैक्टर काम कर सकता है, लेकिन उन्होंने सिर्फ इस भरोसे अपनी चुनावी रणनीति नहीं छोड़ी, बल्कि एक-एक सीट की समीक्षा की.

  • साल 2021 के चुनाव में 40 से ज्यादा सीटें ऐसी थीं, जिन पर जीत-हार का अंतर 10 हजार था
  • इन सीटों पर जीत कैसे मिले इसकी प्लानिंग बनाई, नॉर्थ बंगाल में गोरखा समुदाय को साधा

बंगाली अस्मिता के मुद्दे पर चुनाव लड़ने की कोशिश कर रहीं ममता को न सिर्फ करारा जवाब दिया, बल्कि ये साफ कहा कि अगला मुख्यमंत्री बंगाल से ही होगा, और टीएमसी के गुंडो को तो उल्टा लटकाने की चेतावनी दे डाली, जिसने जनता को भयमुक्त कर दिया, जिसका असर वोटिंग प्रतिशत में भी दिखा..

हालांकि जानकार कहते हैं एसआईआर का फायदा भी बीजेपी को बंगाल में मिला है, पर राजनीति के बड़े-बड़े पंडित जो नहीं कर पाए वो शाह ने कर दिखाया है... एक तरीके से बीजेपी के पितामह का पितृऋण भी चुकाया है.. क्योंकि जिस बंगाल से बीजेपी के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी आते थे, उस बंगाल में पहली बार बीजेपी की सरकार बनी है, जो बीजेपी के लिए गर्व की बात है...

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