इधर मीडिया अतीक को लाइव दिखा रही थी, उधर योगी के इन 2 DYSP ने अतीक के बेटे को ठोंक दिया

Global Bharat 13 Apr 2023 2 Mins
इधर मीडिया अतीक को लाइव दिखा रही थी, उधर योगी के इन 2 DYSP ने अतीक के बेटे को ठोंक दिया

इधर मीडिया अतीक को टीवी पर लाइव दिखाती रह गई, उधर यूपी एसटीएफ ने अतीक के साथ बड़ा खेल कर दिया. यूपी पुलिस के दो डिप्टी एसपी ने ऐसा खेल रचा कि 37 दिनों से भाग रहा अतीक का बेटा असद उसमें न सिर्फ फंसा बल्कि मारा भी गया. पहले अतीक के बेटे और यूपी एसटीएफ के बीच हुई मुठभेड़ की कहानी सुनिए, फिर बताते हैं जब बेटे असद की मौत की ख़बर आई तो कैसे बच्चों की तरह अतीक बिलखने लगा. यूपी पुलिस की ओर से आई जानकारी के मुताबिक

अतीक अहमद का बेटा असद और मकसूदन का बेटा गुलाम दोनों उमेश पाल केस में वांटेड था. इनके ऊपर 5 लाख रुपये का इनाम था. यूपीएसटीएफ में तैनात डिप्टी एसपी नवेंदु और डिप्टी एसपी विमल की टीम ने झांसी में हुए एनकाउंटर में इन दोनों को मार गिराया.

कहा जा रहा है कि यूपी पुलिस का ये प्लान काफी पहले से तैयार था. बीते 37 दिनों से पुलिस कभी दिल्ली तो कभी नेपाल तक में छान मार रही थी, लेकिन असद का सही ठिकाना नहीं मिल पा रहा था, लेकिन झांसी से जैसे ही ये ख़बर आई कि असद यहां छिपा है, दोनों डिप्टी एसपी दल-बल के साथ पहुंच गए. यूपी पुलिस की वेबसाइट पर मिली जानकारी के मुताबिक

डिप्टी एसपी विमल कुमार सिंह जौनपुर के रहने वाले हैं, जिनकी उम्र करीब 53 साल है
जबकि डिप्टी एसपी नवनेंदु कुमार नवीन बिहार के सारण के रहने वाले हैं, और ये 56 साल के हैं

मतलब यूपी पुलिस के दिमाग में ये पहले से बात फिट थी कि अतीक को लाने के लिए युवा ऑफिसर भेजो और असद की तलाश में अनुभवी ऑफिसर लगाओ, ताकि कोई गलती न होने पाए. इस ख़बर को सुनकर उमेश पाल के परिजन सबसे ज्यादा खुश हैं, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य से लेकर कई बीजेपी नेता यूपी एसटीएफ को बधाई दे रहे हैं लेकिन माफिया अतीक अपने बेटे की मौत पर फूट-फूटकर रो रहा है. बुधवार को ही पुलिस अतीक को लेकर गुजरात से प्रयागराज के लिए निकली थी, गुरुवार को उसकी कोर्ट में पेशी हुई, तब उसका भाई अशरफ भी उसके साथ था. कोर्टरूम में अतीक ने सबसे पहले जज साहब को कहा कि हमारे वकील की दलील भी सुनिए, और फिर अशरफ को ये कहते हुए अपने पास बिठाया कि इसका रोजा है, लेकिन जैसे ही उसे ये पता चला कि उसकी पाप की गद्दी का वारिस असद अब इस दुनिया में नहीं रहा, वो अंदर से हिल गया. वैसे तो 24 घंटे पहले ही उसकी सारी माफियागिरी खत्म हो गई थी. जब उसने कहा था

अब कोई माफियागिरी नहीं है, मैं तो जेल में हूं, मुझे असद के बारे में कुछ नहीं पता, लेकिन मेरी सरकार से गुजारिश है कि मेरी पत्नी और बच्चों को परेशान न करें.
अब जरा सोचिए जो अतीक सैकड़ों परिवारों की जिंदगी से खेल रहा था, उसे अब अपने परिवार से पूछताछ पर दर्द हो रहा है, आज पब्लिक कह रही है कि माफियाओं के साथ ऐसा ही होना चाहिए, उन्हें फालतू लाने ले जाने और जेल में रखने का खर्च नहीं होना चाहिए, जबकि कानून कहता है कि सबको समान मौका मिलना चाहिए, चाहे आरोपी हो या अपराधी उसे भी कोर्ट में अपनी बात रखने का हक है, और इसी आधार पर हर एनकाउंटर पर सवाल उठाए जाते हैं, लेकिन यूपी में ऐसा कम ही देखने को मिला है, यूपी पुलिस जो भी कार्रवाई करती है, बिल्कुल सोच-समझकर करती है, आप इस एनकाउंटर पर क्या कहेंगे कमेंट में बता सकते हैं.

https://youtu.be/2jUWAPkUZhg

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