नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 अभी दूर हैं, लेकिन बीजेपी ने दिवाली के बाद मेगा अभियान की तैयारी शुरू कर दी है. पार्टी की योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपकर राज्यव्यापी चुनावी अभियान चलाने की है. मकसद 2027 के चुनाव से काफी पहले संगठन को सक्रिय करना और चुनावी तैयारी को जमीन पर उतारना है.
बीजेपी के प्रस्तावित अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे बड़े चेहरे होंगे. योजना के मुताबिक, मोदी उत्तर प्रदेश के सभी 18 प्रशासनिक मंडलों में रैलियां कर सकते हैं. इन रैलियों का महत्व केवल भीड़ जुटाने तक सीमित नहीं होगा. बीजेपी के लिए प्रधानमंत्री की सभाएं कार्यकर्ताओं में उत्साह भरने, संगठन को सक्रिय करने और राज्य में चुनावी माहौल बनाने का माध्यम भी होंगी. प्रधानमंत्री की बड़ी रैलियों के समानांतर अमित शाह की भूमिका संगठनात्मक तैयारियों पर केंद्रित रहेगी. वे अलग-अलग क्षेत्रों में रैलियों और बूथ स्तर के सम्मेलनों में हिस्सा लेंगे. बीजेपी की चुनावी राजनीति में बूथ प्रबंधन को अहम माना जाता है, जहां पार्टी मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाने और समर्थकों को मतदान केंद्रों तक लाने की तैयारी करती है.
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को विधानसभा क्षेत्र स्तर पर अभियान आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी देने की योजना है. इसके तहत जनसंपर्क कार्यक्रमों, स्थानीय सभाओं और संगठनात्मक गतिविधियों के जरिए पार्टी की पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा. उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस अभियान का प्रमुख चेहरा होंगे. वे जिला स्तर पर रैलियां करेंगे और सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखेंगे. राज्य सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को चुनावी संवाद का हिस्सा बनाना भी इस रणनीति का अहम पहलू होगा.
प्रस्तावित रणनीति के मुताबिक, 20 नवंबर के बाद अभियान में तेजी लाने की तैयारी है. इसी दौरान बूथ स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं और छोटी टीमों को अधिक सक्रिय करने पर जोर रहेगा. योजना के तहत प्रत्येक बूथ की टीम को कम से कम 50 परिवारों तक सीधे पहुंचने का लक्ष्य दिया जा सकता है.
इस जनसंपर्क के दौरान लोगों को केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं, पार्टी की उपलब्धियों और स्थानीय स्तर पर किए गए कामों की जानकारी देने पर ध्यान रहेगा. 2027 के चुनावी समीकरणों में युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. प्रस्तावित अभियान में ऐसे मतदाताओं से सीधे संवाद करने और उन्हें सरकार की पहलों से परिचित कराने पर जोर दिया जाएगा.