सबूत मिटाने के आरोप में जज के खिलाफ केस, नाबालिग बेटे की मर्सिडीज से स्कूटर सवार की मौत के बाद बढ़ीं मुश्किलें

Amanat Ansari 02 Nov 2026 06:11 PM 1 Mins
सबूत मिटाने के आरोप में जज के खिलाफ केस, नाबालिग बेटे की मर्सिडीज से स्कूटर सवार की मौत के बाद बढ़ीं मुश्किलें

कोच्चि: केरल के अतिरिक्त जिला जज की मुश्किलें और बढ़ गई हैं. उनके नाबालिग बेटे की कार से कुचलकर एक व्यक्ति की मौत के मामले में पुलिस ने सोमवार को जज के खिलाफ सबूत मिटाने की कोशिश करने के आरोप में नया केस दर्ज किया है. इससे पहले उनके खिलाफ गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से गाड़ी चलाने के आरोप में केस दर्ज किया गया था.

यह मामला 25 अक्टूबर को हुए सड़क हादसे से जुड़ा है. जज के 17 वर्षीय बेटे की मर्सिडीज-बेंज कार ने चेरानल्लूर इलाके में स्कूटर सवार जयबालकृष्णन को टक्कर मार दी थी. हादसे में जयबालकृष्णन की मौके पर ही मौत हो गई. वह चिट्टूर इलाके में सड़क किनारे खाने का ठेला लगाते थे और मंजली के रहने वाले थे. चेरानल्लूर पुलिस के मुताबिक, मृतक के परिवार ने रविवार को नई शिकायत दर्ज कराई थी. इसमें आरोप लगाया गया कि हादसे के बाद जज काफी देर तक घटनास्थल पर मौजूद रहे और मामले से जुड़े सबूत मिटाने की कोशिश की. परिवार ने आरोप लगाया कि जज हादसे के बाद चेरानल्लूर पुलिस थाने पहुंचे थे और एक पुलिस अधिकारी पर दबाव डालकर अपने बेटे की वह तस्वीर डिलीट करवा दी, जिसे मृतक के परिवार के एक सदस्य ने खींचा था.

कोच्चि की पुलिस कमिश्नर आर. निशांतिनी ने शिकायत मिलने की पुष्टि की है. पुलिस ने जज के खिलाफ सबूत मिटाने की कोशिश का मामला दर्ज कर लिया. इस अपराध में तीन साल तक की जेल, 5 हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों सजाएं हो सकती हैं. इस मामले में चार पुलिसकर्मियों को भी सस्पेंड किया गया है. पुलिस ने निलंबन की वजह आधिकारिक तौर पर नहीं बताई, लेकिन मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि शुरुआत में आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में केस दर्ज नहीं करने और तस्वीर डिलीट किए जाने की घटना को लेकर यह कार्रवाई हुई है.

पुलिस कमिश्नर ने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवार से बात की है और उन्हें भरोसा दिलाया कि चिंता करने की जरूरत नहीं है. मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने भी परिवार से बातचीत की है. हादसे के बाद जज के बेटे को मौके पर ही पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया गया था. उसे पहले थाने से जमानत मिल गई थी. बाद में किशोर न्याय बोर्ड ने उसका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने के आधार पर जमानत दे दी थी. हालांकि, पुलिस ने अब उसकी जमानत रद्द कराने के लिए विशेष अदालत का रुख किया है.

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