नई दिल्ली: यूट्यूबर ध्रुव राठी की कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले 24 घंटों के भीतर उनके खिलाफ मानहानि के दो नए मामले सामने आए हैं। दिल्ली की अलग-अलग अदालतों में उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू हो गई है। पहला मामला भगवान राम और माता सीता पर आधारित एक विवादित वीडियो से जुड़ा है, जबकि दूसरा मामला 2018 के एक पुराने आपराधिक मानहानि केस से संबंधित है।
सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड अमिता सचदेवा और अन्य याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। उनका यह विरोध ध्रुव राठी के उस वीडियो को लेकर था, जिसका शीर्षक 'क्या हिंदू बीफ खा सकते हैं?' था। इस 21 मिनट के वीडियो में कथित तौर पर दावा किया गया था कि भगवान राम और माता सीता ने अपने वनवास के दौरान मांस और शराब का सेवन किया था।
याचिकाकर्ताओं की मांग पर 15 जुलाई 2026 को भारत सरकार ने यूट्यूब को इस वीडियो को हटाने का निर्देश दिया था, जिसके बाद वह याचिका निस्तारित हो गई थी। हालांकि, इसके बाद किसी ने उस वीडियो का 3 मिनट का हिस्सा काटकर फिर से अपलोड कर दिया। इसके बाद याचिकाकर्ताओं को दिल्ली हाई कोर्ट से नई कानूनी कार्यवाही शुरू करने की छूट मिल गई। इसी छूट के आधार पर अब साकेत कोर्ट के जिला न्यायाधीश के समक्ष घोषणा, निषेधाज्ञा और मानहानि के हर्जाने के लिए एक नया मुकदमा दायर किया गया है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान तकनीकी दिक्कतों के कारण वरिष्ठ वकील मकरंद नटकर अपनी दलीलें पूरी नहीं कर सके, जिसके चलते अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर तक के लिए टाल दी है।
इसके अलावा, बीजेपी आईटी सेल के सदस्य विकास पांडे द्वारा 2018 में दर्ज कराए गए आपराधिक मानहानि के मामले में भी ध्रुव राठी को नया समन भेजा गया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट राहुल जैन की अदालत में इस मामले पर सुनवाई चल रही है। विकास पांडे के वकीलों के अनुसार, ध्रुव राठी आमतौर पर ऑस्ट्रिया में रहते हैं और हाल ही में दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में भारत आए थे।
अदालत की अनुमति से हाथों-हाथ तामील (Dasti Service) के जरिए गुरुग्राम स्थित उनके आवास पर समन पहुंचा दिया गया। चूंकि ध्रुव राठी बाहर नहीं आ रहे थे, इसलिए अदालत का नोटिस उनके घर के बाहर चस्पा कर दिया गया। विकास पांडे का आरोप है कि आठ साल पहले ध्रुव राठी ने तीन वीडियो बनाकर यह दावा किया था कि उन्होंने फर्जी खबरें फैलाने के लिए किसी व्यक्ति को 50 लाख रुपये की पेशकश की थी। इस मामले में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल का नाम भी जुड़ा था, जिन्होंने बाद में सुप्रीम कोर्ट में यह स्वीकार किया था कि इसे रीट्वीट करना उनकी गलती थी।