Durg Mayor Controversy: छत्तीसगढ़ के दुर्ग शहर में महापौर अलका बाघमार के साथ एक प्रशासनिक घटना सुर्खियों में है. मामला इतना बढ़ गया कि एएसपी और सीएसपी समेत दो थानों की पुलिस को नगर निगम कार्यालय पहुंचकर हस्तक्षेप करना पड़ा. सब कुछ उरला स्थित एक सरकारी स्कूल में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के भूमिपूजन कार्यक्रम से शुरू हुआ. शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव मुख्य अतिथि थे. महापौर कार्यक्रम में देर से पहुंचीं. तब तक भूमिपूजन की औपचारिकता शुरू हो चुकी थी.
मंच पर पहुंचते ही महापौर ने अधिकारियों पर खुलकर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को समय पर सूचना देने की जिम्मेदारी अधिकारियों की है, लेकिन इसे गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. उन्होंने तीखे शब्दों में अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए और कहा कि केवल औपचारिकताएं निभाने से काम नहीं चलेगा.
अगले दिन केबिन में तनाव
अगले दिन महापौर ने इस मामले में तीन अधिकारियों को अपने कार्यालय के केबिन में बुलाया. इनमें ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के कार्यपालन अभियंता जे.के. मेश्राम, एसडीओ सी.के. सोने और मंडी बोर्ड के एसडीओ प्रवीण पांडे शामिल थे. महापौर ने कार्यक्रम में हुई लापरवाही का कारण पूछा. जब उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो उन्होंने अधिकारियों को केबिन से बाहर जाने नहीं दिया. बताया जा रहा है कि महापौर ने साफ कहा कि जब तक सही जवाब नहीं मिलता, कोई बाहर नहीं जाएगा. अपने गार्ड को भी निर्देश दे दिया गया कि किसी को बाहर न जाने दिया जाए.
पुलिस की दखल के बाद छूटे
लंबे समय तक केबिन में रोके रखे जाने से अधिकारियों में असहजता बढ़ गई. एक अधिकारी ने चुपके से पुलिस को सूचना दे दी. इसके बाद एडिशनल एसपी, सीएसपी और दो थानों की टीम मौके पर पहुंच गई. पुलिस ने स्थिति को संभाला और अधिकारियों को केबिन से बाहर निकाला.
महापौर का आया जवाब
इस पूरे प्रकरण पर महापौर अलका बाघमार ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने अधिकारियों को केवल जवाबदेही के लिए बुलाया था. उन्होंने बंधक बनाने जैसे आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया. महापौर का कहना है कि यह सामान्य चर्चा थी और अधिकारियों ने खुद को बंधक बताकर मामला बढ़ा दिया. उन्होंने कहा कि कोई बंधक वाली स्थिति नहीं थी. यह घटना अब प्रशासनिक तनाव और सियासी चर्चा का विषय बन गई है.