PM Modi UAE Visit: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सिर्फ 2.5 घंटे की संक्षिप्त यात्रा थी, लेकिन इससे नई दिल्ली को बहुत बड़े लाभ मिले. इस यात्रा में रक्षा, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर समझौतों के साथ-साथ अरबों डॉलर के निवेश प्रतिबद्धताएं हासिल हुईं. प्रधानमंत्री की अबू धाबी यात्रा पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक परिवर्तनों और वैश्विक ऊर्जा बाजार की अनिश्चितता के बीच हुई. क्षेत्रीय संघर्ष और महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स (जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी शामिल है) में संभावित व्यवधानों के मद्देनजर दोनों देशों ने स्थिरता, कनेक्टिविटी और आर्थिक मजबूती पर जोर दिया.
पीएम की UAE यात्रा के प्रमुख नतीजे
- रणनीतिक रक्षा साझेदारी के फ्रेमवर्क पर समझौता: मुख्य उपलब्धियों में भारत और UAE के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी के फ्रेमवर्क पर समझौते पर हस्ताक्षर शामिल हैं. यह समझौता सामान्य सैन्य अभ्यासों से आगे बढ़कर उन्नत रक्षा प्रौद्योगिकियों के संयुक्त विकास और सह-उत्पादन, गहन खुफिया जानकारी साझा करने तथा आतंकवाद-विरोधी सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित है.
- सामरिक पेट्रोलियम भंडारण पर MoU: ऊर्जा क्षेत्र में दोनों देशों ने सामरिक पेट्रोलियम रिजर्व पर मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए. यह समझौता अस्थिर कच्चे तेल के बाजार और क्षेत्रीय तनाव से जुड़े सप्लाई व्यवधानों के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा.
वर्तमान साझेदारी को और गहरा करते हुए (जिसमें ADNOC भारत के भूमिगत भंडारों में तेल स्टोर करने वाली विदेशी इकाई है), यह समझौता भारत को विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करेगा और UAE को अपने बढ़े हुए कच्चे तेल उत्पादन के लिए स्थिर लंबी अवधि का बाजार देगा.
- LPG की आपूर्ति पर समझौता: दोनों पक्षों ने Liquefied Petroleum Gas (LPG) की आपूर्ति पर भी एक समझौता किया. इसका उद्देश्य भारत को स्थिर और लंबी अवधि की ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करना है, ताकि आयातों को सुरक्षित और विविधीकरण किया जा सके तथा वैश्विक मूल्य उतार-चढ़ाव का घरेलू उपभोक्ताओं पर प्रभाव कम किया जा सके. Indian Oil Corporation (IOCL) और ADNOC के बीच हस्ताक्षरित यह समझौता UAE से प्राथमिकता वाली लंबी अवधि की LPG सप्लाई सुनिश्चित करेगा. UAE वर्तमान में भारत की घरेलू LPG जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत पूरा करता है.
- वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापना पर MoU: गुजरात के वडिनार में शिप रिपेयर क्लस्टर स्थापित करने के लिए MoU पर हस्ताक्षर हुए. यह परियोजना भारत की समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करेगी और भारत को क्षेत्रीय शिप रखरखाव एवं मरम्मत का हब बनाने में मदद करेगी.
- 5 अरब डॉलर का निवेश: UAE ने 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 42,000 करोड़ रुपये) के निवेश की घोषणा की है. यह निवेश भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं, RBL बैंक की क्रेडिट क्षमता बढ़ाने और हाउसिंग फाइनेंसर Sammaan Capital में तरलता बढ़ाने के लिए होगा.
इन समझौतों से साफ है कि भारत-UAE संबंध पारंपरिक व्यापार और ऊर्जा सहयोग से आगे बढ़कर रक्षा, लॉजिस्टिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर और वित्त क्षेत्र में विस्तार कर रहे हैं.
दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंध
भारत और UAE हाल के वर्षों में प्रमुख आर्थिक साझेदार बन चुके हैं, खासकर Comprehensive Economic Partnership Agreement (CEPA) के बाद. द्विपक्षीय व्यापार अब 100 बिलियन डॉलर से ऊपर पहुंच चुका है. दोनों देश आने वाले वर्षों में इसे 200 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखते हैं.
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