नई दिल्ली: भारत ने शुक्रवार शाम ओडिशा के समुद्र तट से एक परमाणु सक्षम इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया. रक्षा सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, यह मिसाइल ICBM श्रेणी की है, हालांकि DRDO ने अभी तक इस परीक्षण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है. कई विशेषज्ञ इसे अग्नि-6 मिसाइल के विकास से जोड़कर देख रहे हैं.
पाकिस्तान-चीन क्यों चिंतित?
मलेशिया स्थित डिफेंस सिक्योरिटी एशिया वेबसाइट ने लिखा है कि इस परीक्षण ने पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का रणनीतिक संतुलन बदल दिया है. पाकिस्तान खासतौर पर इस बात से डरा हुआ है कि दुनिया में फिलहाल सिर्फ अमेरिका, रूस, चीन और उत्तर कोरिया के पास ही ICBM तकनीक है. अगर भारत इस क्षमता को पूरी तरह हासिल कर लेता है तो उसकी पहुंच अमेरिका तक भी हो सकती है, जबकि पाकिस्तान के पास ऐसी कोई क्षमता नहीं है.
भारत की बैलिस्टिक मिसाइलें दुनिया के किसी भी देश की तुलना में बेहतर हैं. इनके इंटरसेप्ट होने की संभावना बेहद कम है. यही वजह है कि ईरान को हमले के लिए दर्जनों मिसाइलें एक साथ दागनी पड़ती हैं, जबकि भारत एक सटीक मिसाइल से अपना लक्ष्य भेद सकता है.
परीक्षण की क्या है खासियत
चीन को संदेश देना है मकसद
पाकिस्तान के खिलाफ ICBM की जरूरत नहीं है, लेकिन इस परीक्षण का असली मकसद चीन को संदेश देना है. भारत की अग्नि सीरीज की मिसाइलें चीन की मुख्य भूमि के अंदर गहरे रणनीतिक लक्ष्यों जैसे मिसाइल अड्डे, परमाणु ठिकाने और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने में सक्षम हैं.
चीन हिंद महासागर में अपनी नौसैनिक मौजूदगी और परमाणु क्षमता लगातार बढ़ा रहा है. ऐसे में MIRV तकनीक वाली, पैंतरेबाजी करने वाली और लंबी दूरी की मिसाइलें चीन की मिसाइल रक्षा प्रणाली को और चुनौतीपूर्ण बना देंगी. 8 मई का यह परीक्षण महज एक सामान्य मिसाइल टेस्ट नहीं था.
यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक ताकत, लंबी दूरी की सटीक हमला क्षमता और उत्तरजीवी मिसाइल प्रौद्योगिकी की ओर एक मजबूत कदम है. इससे दो मोर्चों पर संभावित संघर्ष की स्थिति में भारत की मिसाइल क्षमता और मजबूत हो गई है.