हिंद-प्रशांत में मजबूत होती US-India वायु सेना साझेदारी, चीन के लिए चुनौती

Amanat Ansari 05 May 2026 03:30: PM 4 Mins
हिंद-प्रशांत में मजबूत होती US-India वायु सेना साझेदारी, चीन के लिए चुनौती

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिका-भारत अंतर-संचालन क्षमता को मज़बूती

नई दिल्ली: महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों और व्यापारिक रास्तों से लेकर आपदा प्रतिक्रिया तक, हिंद-प्रशांत क्षेत्र वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता के केंद्र में स्थित है. अमेरिका के लिए इस विशाल क्षेत्र में सैन्य संचालन के लिए निरंतर तैयारी, मज़बूत समन्वय और टकराव वाले माहौल में तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षमता आवश्यक है.

पैसिफिक एयर फोर्सेस (पीएसीएएफ़)  अमेरिकी वायु सेना की एक प्रमुख कमांड है जिसका मुख्यालय हिकम एयर फोर्स बेस, हवाई में स्थित है और यू.एस. इंडो-पैसिफिक कमांड (यूएसइंडोपैकम) का वायु घटक है. इसका मुख्य उद्देश्य हमले को रोकना और एक स्वतंत्र तथा खुला हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना है. यह मिशन “शक्ति के माध्यम से शांति” की रणनीति के जरिए पूरा किया जाता है, जो विश्वसनीय, युद्ध के लिए तैयार वायु शक्ति और मजबूत गठबंधनों व साझेदारियों पर आधारित है.

इन प्रयासों में भारत एक महत्वपूर्ण भागीदार है, क्योंकि अमेरिका और भारत सैन्य अभ्यासों, योजना और ऑपरेशन समन्वय के माध्यम से सहयोग का विस्तार कर रहे हैं. द्विपक्षीय रक्षा व्यापार और भारत के साथ संयुक्त प्रशिक्षण ने इस बढ़ती अंतर-संचालनता में सीधे योगदान दिया है.

पीएसीएएफ़ के कमांडर जनरल केविन श्नाइडर बताते हैं कि “भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय रक्षा व्यापार में वृद्धि के साथ इंटरऑपरेबिलिटी भी बढ़ी है,” और जोड़ते हैं कि “हमारी साझेदारी का महत्व लगातार बढ़ रहा है, विशेषकर तब जब हम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक अधिक जटिल और गतिशील सुरक्षा वातावरण का सामना कर रहे हैं.”

संचालन प्राथमिकताओं का विकास

जैसे-जैसे हिंद-प्रशांत क्षेत्र एक बहुआयामी भू-राजनीतिक वातावरण का सामना कर रहा है,  विवादित क्षेत्रों में कमांड एवं नियंत्रण तथा लॉजिस्टिक्स को मजबूत करना प्राथमिकता बन गया है. इसे संबोधित करने के लिए परिचालन दृष्टिकोण को एजाइल कॉम्बैट एम्प्लॉयमेंट के माध्यम से अनुकूलित किया जा रहा है, जो बलों के विकेंद्रीकरण, अस्तित्व बचाए रखने की क्षमता बढ़ाने और लंबी दूरी पर संचालन गति बनाए रखने पर केंद्रित है. इसमें सामग्री को पहले से तैनात करना और छोटे, बिखरे हुए स्थानों के नेटवर्क से संचालन करना शामिल है, ताकि गति और पैमाने पर संचालन संभव हो सके.

भारतीय वायु सेना जैसे साझेदारों के साथ जुड़ाव इस अनुकूलनशील दृष्टिकोण का समर्थन करता है, जिसमें मजबूत साझेदार एकीकरण, अधिक जानकारी साझा करना और इंटरऑपरेबिलिटी का परीक्षण शामिल है. अभ्यासों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वे युद्ध और संकट प्रतिक्रिया की अवधारणाओं को सहयोगियों और साझेदारों के साथ मिलकर परखें, सुधारें और उन्हें एक एकीकृत बल के रूप में संचालित होने में सक्षम बनाएं.

यह संबंध वर्षों में काफी परिपक्व हुआ है; श्नाइडर कहते हैं, “साथ मिलकर काम करने की हमारी क्षमता बुनियादी समन्वय से विकसित होकर जटिल परिस्थितियों में उच्च स्तरीय इंटरऑपरेबिलिटी तक पहुंच गई है.”

गतिशीलता और त्वरित अनुकूलन का यह दृष्टिकोण हाल ही में बड़े पैमाने के रेजोल्यूट फोर्स पैसिफिक (रेफोरपैक) अभ्यास में परखा गया, जिसमें 400 से अधिक विमान और 12,000 से अधिक कर्मियों ने 50 स्थानों पर भाग लेकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बड़े पैमाने पर संचालन की क्षमता का प्रदर्शन किया.

इसी तरह, भारत के साथ टाइगर ट्रायम्फ जैसे सहयोगी अभ्यास विशेष रूप से लॉजिस्टिक्स, मानवीय सहायता और कठिन परिस्थितियों में आपदा राहत के लिए संयुक्त क्षमताओं के विकास पर केंद्रित हैं.

साइबर और अंतरिक्ष का समन्वय

वायु संचालन अब तेजी से साइबर और अंतरिक्ष क्षमताओं से जुड़ रहे हैं. अमेरिका सहयोगियों और साझेदारों के साथ प्रशिक्षण, अभ्यास और योजना के माध्यम से इन क्षेत्रों में उभरती चुनौतियों का सामना करते हुए संचालन एकीकरण को गहरा कर रहा है. सभी साझेदारियों में लक्ष्य निर्बाध संचालन हासिल करना है. यह महत्वाकांक्षा व्यापक अमेरिका-भारत प्रमुख रक्षा साझेदारी को दर्शाती है, जिसमें सूचना साझाकरण, क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग और इन महत्वपूर्ण नए क्षेत्रों में गहरा सहयोग शामिल है.

त्वरित प्रतिक्रिया

रणनीतिक वायु गतिशीलता हिंद-प्रशांत क्षेत्र के विशाल विस्तार में सुरक्षा संचालन और  मानवीय प्रतिक्रिया दोनों के समर्थन के लिए केंद्रीय बनी हुई है. हाल के अभ्यासों में सिद्ध हुआ है कि सैकड़ों विमानों और हजारों कर्मियों की तैनाती की क्षमता त्वरित प्रतिक्रिया के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है.

आगे की दिशा

यह दृष्टिकोण इस मान्यता को भी दर्शाता है कि सहयोगियों और साझेदारों का नेटवर्क अमेरिका की सबसे बड़ी रणनीतिक संपत्तियों में से एक है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए साझा जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है.

क्वाड (जिसमें अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं) महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर ऐसे सहयोग के लिए एक प्रमुख तंत्र के रूप में कार्य करता है, जिससे भारत जैसे साझेदार विकसित होते संचालन परिदृश्य में एकीकृत हो सकें.

आगे देखते हुए, सबसे बड़े अवसर रणनीतिक साझेदारियों को और मजबूत करने में निहित हैं, ताकि द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समूहों जैसे क्वाड के माध्यम से स्थिरता को बढ़ावा दिया जा सके. भविष्य का सहयोग उभरते क्षेत्रों, प्रौद्योगिकी और क्षेत्रीय सुरक्षा पर केंद्रित रहने की उम्मीद है, क्योंकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक और रणनीतिक समन्वय लगातार मजबूत हो रहा है.

श्नाइडर ने कहा, “एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र की नींव हमारे रणनीतिक संबंधों की मजबूती पर टिकी है. भारत में, हमारे पास एक ऐसा साझेदार है जिसके साझा मूल्य और दृष्टिकोण क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए हमारे संयुक्त संकल्प को सुनिश्चित करते हैं.”

लेखक: चार्वी अरोड़ा

सौजन्य: स्पैन

India-US Relations India and the Quad US-India Military Partnership US-India Air Force

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