नई दिल्ली: इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच हुई शांति वार्ता विफल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से टेलीफोन पर लंबी चर्चा की. दोनों नेताओं के बीच यह फोन कॉल करीब 40 मिनट तक चली. ईरान संकट के दौरान यह दूसरी बार है जब ट्रंप ने पीएम मोदी से सीधे फोन पर बात की है.
बातचीत में मुख्य रूप से भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा हुई. सूत्रों के अनुसार, बातचीत के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप से कहा कि "भारत के लोग आपसे बहुत प्यार करते हैं." अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर ने इस फोन कॉल की कुछ जानकारी साझा की. उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और शांति प्रक्रिया में भारत की संभावित भूमिका भी शामिल थी.
राजदूत गोर ने यह भी बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो अगले महीने भारत का दौरा करने वाले हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने खुद एक्स (पूर्व ट्विटर) पर इस बातचीत की पुष्टि की. उन्होंने लिखा, "मेरे दोस्त राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का फोन आया. हमने द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की और सभी क्षेत्रों में अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई. हमने पश्चिम एशिया की स्थिति पर भी चर्चा की और होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला और सुरक्षित रखने पर जोर दिया."
यह ध्यान देने वाली बात है कि इससे पहले 24 मार्च को भी ट्रंप और मोदी के बीच फोन पर बात हुई थी, जो ईरान युद्ध के दौरान दोनों के बीच पहली बातचीत थी. उस समय भी दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति और होर्मुज स्ट्रेट के महत्व पर चर्चा की थी. राजदूत सर्जियो गोर ने आगे कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप नियमित रूप से PM मोदी को क्षेत्रीय स्थिति पर अपडेट देते रहते हैं.
उन्होंने मिडिल ईस्ट में चल रही घटनाओं की जानकारी दी और भारत-अमेरिका के बीच चल रहे विभिन्न सहयोगी मुद्दों पर भी चर्चा हुई. शांति प्रक्रिया में भारत की भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में राजदूत गोर ने कहा कि पूरी दुनिया शांति प्रयासों में योगदान दे सकती है और भारत भी इसमें शामिल हो सकता है. ट्रंप किसी भी ऐसे व्यक्ति या देश का स्वागत करते हैं जो शांति स्थापना में मदद करना चाहता हो.
ईरान युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर उन्होंने कहा कि एक देश ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग को बंधक बना रखा है, जिसे किसी भी देश को करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने सभी पक्षों से इसे फिर से खोलने की अपील की. कुल मिलाकर यह बातचीत दोनों देशों के बीच गहरे रणनीतिक संबंधों और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.