Indian Fast Breeder Nuclear Reactor: जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप उधर ईरान से यूरेनियम चुराने का प्लान बना रहे थे, दुनिया परमाणु के ढेर पर बैठी है, इसकी चिंता कई एक्सपर्ट जता रहे थे, तब भारतीय वैज्ञानिक एक ऐसी खोज में लगे थे, जिसके पूरा होते ही भारत की अगले 700 सालों की चिंता दूर हो गई है, आप ये जानकर दंग रह जाएंगे कि भारत ने जिस प्लान को सफल बनाया है, उस प्लान पर अमेरिका ने करीब 1 लाख 20 हजार करोड़, जापान ने करीब 99000 करोड़, ब्रिटेन ने करीब 74000 करोड़ और जर्मनी ने करीब 55000 करोड़ खर्च किए.
लेकिन वहां के वैज्ञानिक इसे सफल नहीं बना पाए और ये कहा भी इस तकनीक को हासिल करना काफी महंगा और मुश्किल है. लेकिन भारतीय वैज्ञानिकों ने उनकी थ्योरी ही पलट डाली. जैसे एपीजे अब्दुल कलाम ने अपनी प्रतिभा से दुनियाभर के वैज्ञानिकों को चौंकाया था, ठीक वैसे ही इस बार भी भारतीय वैज्ञानिकों ने इस मुश्किल तकनीक को 90 करोड़ में ऐसा सफल बनाया कि अमेरिका समेत खुद को विकसित कहने वाले कई देश दंग रह गए.
खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस सफलता पर वैज्ञानिकों को बधाई दी और इसे हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण बताया. तो सवाल उठता है ये तकनीक कौन सी है, तो पहले वो सुनिए, फिर ये भी बताते हैं इसके फायदे क्या-क्या हैं.
क्या है प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर तकनीक
इसे कहते हैं आपदा को अवसर में बदलना, ये प्रोजेक्ट वैसे तो लंबे वक्त से चल रहा था. लेकिन जब दुनियाभर में यूरेनियम और ईंधन की लड़ाई शुरू हुई, बिजली संकट की चर्चा होने लगी, तो भारत ने ऐसे वक्त में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है, ये तकनीक अब तक सिर्फ रूस के पास है. भारत में फिलहाल इसका दूसरा चरण पूरा हो चुका है, तीसरा चरण पूरा होते ही अगले करीब 700 सालों के लिए भारत की बिजली जरूरतों की चिंता न सिर्फ दूर हो जाएगी, बल्कि दुनियाभर के कई देशों को भारत बिजली बेचने भी लगेगा, क्योंकि अब तक बड़े-बड़े देशों के वैज्ञानिक थोरियम को बिजली ऊर्जा में बदलने की तकनीक नहीं बना पाए थे.
साल 2003 में भारत सरकार ने परमाणु रिएक्टर-प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के निर्माण और संचालन के लिए भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) को मंजूरी दी थी और इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) ने इस रिएक्टर को डिजाइन किया था.
लेकिन बाद में तकनीकी दिक्कतों की वजह से कई बार इसके डिजाइन में बदलाव किया गया, पूरी तरह से इस टेक्नोलॉजी को स्वदेशी बनाने के लिए लगातार काम किया गया, और साल 2024 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने खुद इस जगह का दौरा किया था. जहां वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया और अब ये तकनीक साल 2026 परमाणु ऊर्जा बनाने में नया इतिहास रच सकती है..और इस बात के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को बधाई तो बनती है...अब तक आप खिलाड़ियों को मेडल जीतने पर, फिल्मी सितारों को मूवी हिट होने पर और नेताओं को चुनाव जीतने पर बधाई देते रहे हैं, लेकिन अब वैज्ञानिकों को भी बधाई देने की बारी है, पूरे देश को ये बताने की बारी है कि हमारे वैज्ञानिकों ने कमाल कर दिया है...