खरगोन: महाकुंभ वायरल गर्ल के नाम से मशहूर मोनालिसा एक बार फिर सुर्खियों में है. महज एक महीने बाद जब उसकी एक मुस्लिम युवक से शादी की खबर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई थी. मध्य प्रदेश के खरगोन पुलिस ने मोनालिसा के पति फरमान के खिलाफ POCSO मामला दर्ज कर लिया है. जांच में पुष्टि हो गई है कि मोनालिसा नाबालिग है.
उसके खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र और अवैध विवाह से संबंधित भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के अलावा अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी केस दर्ज किया गया है.
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने सरकारी अस्पताल के आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर पुष्टि की कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था. इस हिसाब से 11 मार्च को हुई शादी के समय वह 16 वर्ष, 2 महीने और 12 दिन की थी.
मोनालिसा, जो परधि जनजाति समुदाय की है, पहली बार प्रयागराज के कुंभ मेला में रुद्राक्ष की मालाएं बेचते हुए चर्चा में आई थी. एक कंटेंट क्रिएटर द्वारा बनाया गया उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और रातोंरात वह इंटरनेट सेंसेशन बन गई.
जांच कैसे हुई?
जांच की शुरुआत केरल के नैनार देवा मंदिर से हुई, जहां यह शादी संपन्न हुई थी. मंदिर प्रशासन ने जांचकर्ताओं को बताया कि शादी जोड़े की उम्र के आधार पर की गई थी, जो उनके आधार कार्ड में दर्ज थी. बाद में इस शादी को ग्राम पंचायत कार्यालय में रजिस्टर्ड कराया गया, जिसमें एक जन्म प्रमाण-पत्र का इस्तेमाल किया गया जो जांच में फर्जी पाया गया.
यह प्रमाण-पत्र महेश्वर नगर पालिका द्वारा जारी किया गया था, जिसमें मोनालिसा की जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 बताई गई थी — जो सरकारी अस्पताल के रिकॉर्ड से लगभग दो साल पहले की है. आयोग ने स्थानीय अधिकारियों को इस फर्जी दस्तावेज को रद्द करने का निर्देश दिया है. आयोग ने इस मामले में कुछ राजनीतिक दलों और संगठनों की संलिप्तता पर भी सवाल उठाया है.
17 मार्च को आयोग के समक्ष मामला पेश करने वाले एडवोकेट प्रथम दुबे ने दावा किया कि केरल के CPI(M) नेता और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के सदस्य इस शादी को कराने में शामिल थे. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यह शादी लव जिहाद की अवधारणा के खिलाफ एक जानबूझकर तैयार किया गया काउंटर नैरेटिव बनाने का प्रयास था.
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग ने केरल और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (DGPs) को 22 अप्रैल को नई दिल्ली स्थित अपने मुख्यालय बुलाया है. साथ ही दोनों राज्यों के DGPs से हर तीन दिन में मामले की प्रगति रिपोर्ट मांगी गई है, जब तक मामला पूरी तरह सुलझ नहीं जाता.