बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली से एक साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है, जिसमें एक क्लास 8 के बच्चे की सतर्कता और तेज सोच ने उसके माता-पिता को लाखों रुपए के नुकसान से बचा लिया. फ्रॉडस्टर्स ने उन्हें लगभग 10 घंटे तक वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट में रखा हुआ था. घटना प्रेम नगर इलाके की है. पुलिस के अनुसार, फ्रॉडस्टर्स ने एक स्थानीय व्यापारी संजय सक्सेना और उनकी पत्नी को अज्ञात नंबर से फोन करके खुद को जांच एजेंसी के अधिकारी बताया.
धोखेबाजों ने संजय सक्सेना पर आतंकवादी गतिविधियों और करोड़ों रुपए के घोटाले से जुड़े होने का आरोप लगाया. उन्होंने वीडियो कॉल के दौरान नकली गिरफ्तारी वारंट भी दिखाया. दंपति को धमकाया गया और मानसिक दबाव डाला गया. फ्रॉडस्टर्स ने उन्हें लगातार कैमरे पर रखा और डिजिटल अरेस्ट का बहाना बनाया.
पुलिस ने बताया कि घोटालेबाजों ने सख्त शर्तें रखीं कि घर से बाहर न निकलना, वीडियो कॉल हमेशा चालू रखना और खाना-पीना, सोना-जागना सब कुछ उनके निगरानी में करना. इस लंबे कॉल के दौरान फ्रॉडस्टर्स ने बैंक की संवेदनशील जानकारी निकाल ली और पैसे ट्रांसफर करने की तैयारी कर रहे थे. लगभग 10 घंटे तक डर के मारे दंपति कुछ पूछ भी नहीं पा रहा था.
तभी उनके बेटे तन्मय को शक हुआ. माता-पिता के डर के बावजूद रात में उसने फोन को फ्लाइट मोड पर कर दिया, जिससे फ्रॉडस्टर्स से संपर्क पूरी तरह कट गया. तन्मय की इस चतुराई से घोटाला रुक गया और परिवार को कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ. अगली सुबह परिवार प्रेम नगर पुलिस स्टेशन पहुंचा. जब फोन दोबारा ऑन किया गया तो फ्रॉडस्टर्स फिर से कॉल करने की कोशिश की, लेकिन इस बार पुलिस वाले ने फोन उठाया और उन्हें चुनौती दी.
एसपी सिटी मनुष पारीक ने इसकी पुष्टि की और कहा कि मामला दर्ज कर लिया गया है. उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ऐसी कोई भी डिजिटल अरेस्ट या धमकी वाली कॉल आने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें और किसी भी दबाव में बैंक डिटेल्स या पैसे न दें. अगर आपको ऐसी कोई कॉल आए तो घबराएं नहीं, फोन काट दें और तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन (1930) पर सूचना दें.