लखनऊ: यूपी की राजधानी लखनऊ, जहां बड़े-बड़े अधिकारी बैठते हैं, पूरे प्रदेश के फैसले जहां से लागू होते हैं, वहीं के विकासनगर क्षेत्र में फर्जी एनजीओ बनाकर बेरोजागर युवाओं से करोड़ों की ठगी हो जाती है, और न पुलिस को ख़बर होती है ना ही मंत्रालय को...आज तक अपनी रिपोर्ट में दावा करता है.
करीब 150 युवाओं ने इनकी बातों में आकर पैसे दिए, डॉक्यूमेंट दिखाए, और यहां तक कि एक बड़े होटल में बकायदा ट्रेनिंग भी ली, जहां रोजाना 4 घंटे की क्लास होती, ये बताया जाता कि फील्ड में कैसे लोगों को जाकर समझाना है, करीब 10 दिनों तक उनके नाश्ते-खाने का इंतजाम भी होटल में किया गया था, ताकि किसी को कोई शक न हो कि ये पूरा ग्रुप फर्जी है. इन जालसाजों की हिमाकत देखिए, पहले ये ट्रेनिंग देते हैं, फिर ज्वाइनिंग लेटर देते हैं, और फील्ड में भेजकर कहते हैं जाकर ज्वाइन कर लीजिए, इसके बाद दो तरह की थ्योरी सामने आती है. पहली ये कि ये लोग जैसे ही ज्वाइनिंग के लिए पहुंचते हैं, जिले के स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी साफ कहते हैं ऐसी कोई पोस्ट या ऐसे किसी अभियान की जानकारी मुझे है ही नहीं, ऐसी कोई योजना ही नहीं चल रही है, उसके बाद इन्हें ठगी का एहसास होता है...
जबकि दूसरी थ्योरी ये बताई जा रही है कि इन्होंने जब कुछ दिन काम किया, और फिर स्वास्थ्य विभाग ने जांच की तो पूरे खेल का खुलासा हुआ. अब कहानी कैसे खुली, इससे ज्यादा बड़ी बात ये है कि इतनी बड़ी घटना हुई कैसे...ज्यादातर लोग जो महाराजगंज, देवरिया औऱ गोरखपुर के रहने वाले हैं, उनके लिए ये होश उड़ा देने वाला था, ठगों ने बड़े ही शातिराना अंदाज में इस पूरे खेल को अंजाम दिया.
पीड़ितों में चंद्रमणि तिवारी, गरिमा पाठक, मनीषा पटेल, मुशीर अहमद खान, ललिता, सचिन पाठक, सविता राय, अरविंद गुप्ता, अमित सिंह, अजीत सिंह, अभय शर्मा, कमर्स रावत, नेहा उर्फ फातिमा, अनीता शर्मा, नमिता तिवारी, जयशंकर तिवारी, अशोक पांडेय समेत कई शामिल हैं.
जो अब इंसाफ की गुहार लगा रहे हैं, अपने पैसे वापस मांग रहे हैं, पर सवाल है क्या यूपी पुलिस उन जालसाजों से इनकी रकम वसूलकर इन्हें लौटा पाएगी. योगीराज में वैसे तो कुछ भी संभव है, बड़े-बड़े माफियाओं पर जब शिकंजा कसा जा सकता है, वो मिट्टी में मिलाए जा सकते हैं, उनके अवैध कब्जों की जमीन पर गरीबों को मकान मिल सकता है, तो फिर इन जालसाजों पर भी एक्शन की उम्मीद अब पीड़ितों को है...पर सवाल ये है कि जब ये सबकुछ खेल चल रहा था तो किसी को कानोंकान इसकी ख़बर क्यों नहीं हुई..
विकासनगर थाना प्रभारी के हवाले से दैनिक भास्कर लिखता है कि पारसनाथ, विपिन और प्रताप सिंह के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. अब तक करीब 150 पीड़ितों की जानकारी मिली है, अन्य की तलाश की जा रही है.
ये लोग कहां के रहने वाले हैं, इनके पीछे किसका हाथ है और क्या 150 से ज्यादा लोग इनके शिकार हुए, ये सब अब पुलिस की जांच के बाद खुलासा होगा. पर अगर कोई नौकरी देने का ऐसे लालच दे तो आप उसके झांसे में न आएं, और ये जानकारी गांव-गांव तक जरूर पहुंचाएं ताकि ऐसे जालसाजों के झांसे में कोई न आए...