क्या हैं वे 10 शर्तें, जिन्हें ईरान ने चीन के साथ मिलकर तैयार किया और ट्रंप युद्धविराम के लिए राजी हो गए?

Abhishek Chaturvedi 08 Apr 2026 08:23: PM 3 Mins
क्या हैं वे 10 शर्तें, जिन्हें ईरान ने चीन के साथ मिलकर तैयार किया और ट्रंप युद्धविराम के लिए राजी हो गए?

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति ड़ोनाल्ड ट्रंप सोशल मीडिया पोस्ट में लिखते हैं कि पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से बातचीत के बाद अमेरिका सीजफायर के लिए राजी हो गया है. लेकिन जब ट्रंप से मीडिया पूछती है कि क्या इसमें चीन की बड़ी भूमिका है तो कहते हैं हां.. फिर ट्रंप ने नाम क्यों नहीं लिया, क्या वो चीन को क्रेडिट देने से बचना चाहते हैं... ईरान का तो दावा है कि अमेरिका ने हमसे जंग रोकने के लिए मिन्नतें की, उसके बाद हमने हामी भरी. तो सही कहानी क्या है, इसे समझने के लिए समझौते की शर्तें जाननी होंगी. इन 10 शर्तों पर ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर हुआ है...

  • पहली शर्त- अमेरिका और इजराइल न केवल मौजूदा बमबारी रोकें, बल्कि भविष्य में ऐसा न करने की लिखित गारंटी दें.
  • दूसरी शर्त- सभी परमाणु और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाया जाए, ताकि ईरान फिर वैश्विक तेल बाजार में लौट सके.
  • तीसरी शर्त- अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने जो 100 बिलियन डॉलर का फंड फ्रीज किया है, वो दें.
  • चौथी शर्त- 14 दिन का सीजफायर स्थायी शांति में बदले, ताकि मिडिल ईस्ट में युद्ध हमेशा के लिए खत्म हो.
  • पांचवीं शर्त- खाड़ी देशों और इराक से अमेरिकी सैन्य ठिकानों को समेटा जाए. स्थानीय देश अपनी सुरक्षा करें.
  • छठी शर्त- हमलों से हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका करे, या इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक करवाए.
  • सातवीं शर्त- हॉर्मुज स्ट्रेट ईरान की 'समुद्री सीमा' का हिस्सा है, और इस पर ईरान का ही कंट्रोल होगा.
  • आठवीं शर्त- ईरानी सेना से को-ऑर्डिनेशन के बाद ही होर्मुज से किसी जहाज को रास्ता मिलेगा.
  • नौंवीं शर्त- हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले हर शिप को ईरान और ओमान को समुद्री टोल देना होगा. जो 20 लाख डॉलर तक हो सकता है.
  • दसवीं शर्त- इजराइल लेबनान में हिजबुल्लाह, यमन में हुती और सीरिया के खिलाफ ऑपरेशन बंद करे.

फिलहाल इन समझौतों की शर्तों में से कुछ ही पूरी तरह से लागू हो पाई है... तो सवाल ये उठ रहा है कि अगले 14 दिनों में अगर सारी शर्तें नहीं मानी गई तो क्या फिर जंग होगी. फिलहाल इसके आसार नहीं दिखते, क्योंकि इस बार चीन ने ये समझौता करवाया है... सबसे पहले चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर अमेरिका को रोका.

वरना अमेरिका होर्मुज खुलवाने के लिए उकसाने वाला प्रस्ताव लेकर आया था, उससे पहले ट्रंप ने खुद चीनी राष्ट्रपति से फोन कर मदद मांगी थी, ऐसी ख़बरें आईं थीं. उसके बाद जब पाकिस्तान की ओर से प्रस्ताव भेजे गए, और ईरान ने उसे ठुकराया तो चीन की मदद से ही ईरान का ये 10 प्वाइंट वाला प्रस्ताव ट्रंप तक पहुंचवाया गया, और फिर अमेरिका ने इसे स्वीकार लिया.

क्योंकि चीन और रूस इस जंग में ईरान के साथ थे, अगर ट्रंप कोई भी गलती करते तो फिर ये महायुद्ध में तब्दील हो सकता था. जिसकी वजह से ट्रंप को ये समझौता करना पड़ा, और पाकिस्तान को इसका मुखिया बताकर वो अपनी लाज बचाना चाहते हैं. क्योंकि चीन का नाम अगर लेंगे तो बात यही होगी कि अमेरिका को हार माननी पड़ी.

पर समझौते की जो शर्तें आपने देखीं वो साफ बता रही हैं कि ट्रंप को आंशिक जीत की कीमत काफी महंगी पड़ी है. इस जंग को शुरू करने के बाद उन्होंने जिस हिसाब से ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई का खात्मा करवाया, उसके बाद लग रहा था जंग लंबी नहीं चलेगी, लेकिन ईरानी सेना ने उनका भ्रम तोड़ दिया, और अब समझौते के मुताबिक मोजतबा खामेनेई ने भी अपनी सेना को भी हमले रोकने का आदेश दिया है.

पर सवाल ये है कि क्या ईरान जो टोल अब लेगा, उससे तेल की कीमतें दुनियाभर में बढ़ने वाली हैं, या फिर ये टोल उसने सिर्फ यूरोपियन मुल्कों के लिए लगाया है.. क्योंकि दोस्तों के लिए तो उसका ये रास्ता जंग के वक्त भी खुला रहा...

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