गुरु अवैद्यनाथ की विरासत, योगी आदित्यनाथ का विजय पथ! पढ़िए हिंदुत्व की वो कहानी जो BJP भी रोक नहीं पाई...

Global Bharat 30 Jan 2026 01:45: PM 9 Mins
गुरु अवैद्यनाथ की विरासत, योगी आदित्यनाथ का विजय पथ! पढ़िए हिंदुत्व की वो कहानी जो BJP भी रोक नहीं पाई...

Yogi Adityanath: 28 फरवरी साल 2017 को योगी आदित्यनाथ एक इंटरव्यू देते हैं! उस इंटरव्यू में पांच बातें योगी ऐसी कहते हैं कि हर हिन्दू का दिल गदगद हो जाता है! संविधान से अलग समाज के उन सवालों को उठाया, जिसके बाद पूरे UP में उनकी तूती बोलने लगी! योगी आदित्यनाथ 5 बार सांसद बने लेकिन बीजेपी सरकार में वो मंत्री एक बार भी नहीं बने.... यहां तक कि 2017 के चुनाव में परिवर्तन रैली के दौरान योगी का पोस्टर गायब था...

दिसंबर 2016 में बीजेपी में एक इलेक्शन कमेटी बनी थी. उस कमेटी में योगी का नाम नहीं था! बीजेपी ने उन्हें चुनाव में स्टार प्रचारक बनाया, हालांकि उन्हें कोई ख़ास तवज्जो बीजेपी में नहीं मिली! आज योगी यहां पर हैं तो अपने दम पर हैं! आज आपको एक ऐसी कहानी सुनाएंगे जो आपको इंटरनेट पर नहीं मिलेगी... योगी आदित्यनाथ को जानने से पहले दो पीढ़ी पीछे जाना होगा...

गोरखपुर मठ से जुड़ा है इतिहास

गोरखपुर मठ का इतिहास पुराना है... लेकिन योगी आदित्यनाथ जिस गद्दी पर बैठे हैं वो हिन्दुओं की अलख पिछले शताब्दी से जगा रही है! साल था 1948 का... गोरखपुर मठ के पीठाधीश्वर थे महंत दिग्विजय नाथ महात्मा गांधी की हत्या से ठीक एक दिन पहले कहते हैं गांधी जी को मरना चाहिए! ठीक तीसरे दिन नाथूराम गोडसे के हाथों महात्मा गांधी की हत्या होती है... गोरखपुर पीठाधीश्वर महंत दिग्विजय नाथ को गिरफ्तार कर लिया गया! 9 महीने तक जेल में रहे! साल 1949 में राम मंदिर आंदोलन में गोरखपुर मठ ने नेतृत्व किया... दिग्विजय नाथ राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले थे! साल 1950 में उन्होंने एक नया बयान दिया... कहा- मुसलमानों को वोट देने से वंचित करना चाहिए, आज़ादी के बाद ये बयान काफी चर्चा में आया! साल 1967 में महंत दिग्विजय नाथ हिन्दू महासभा के टिकट से सांसद बन जाते हैं...हिन्दू राष्ट्र, हिन्दू रक्षा और हिन्दुओं की एकता का नारा संसद तक पहुंच जाता है! 

  • गोरखपुर मठ का इतिहास ऐसा रहा है, जहां गुरु ऐसा शिष्य चुनते हैं जो राजनीति का नक्शा बदल देता है! 1
  • 919 में एक साधारण परिवार में कृपाल सिंह बिष्ट का जन्म होता है, आगे चलकर वो गोरखनाथ मठ के महंत बन जाते हैं और उनको नाम दिया जाता है महंत अवैद्यनाथ...
  • योगी के गुरु अवैद्यनाथ भी हिन्दू सभा के टिकट पर साल 1962 में गोरखपुर के मानीराम विधानसभा निर्वाचन से विधायक बने, साल 1969 में उन्हें गोरखपुर मठ का पीठाधीश्वर बनाया गया!
  • गोरखपुर मठ का एक इतिहास मिलता है, पीठाधीश्वर कोई भी रहे, सनातन का झंडा बुलंद करते रहे हैं...

जब 1500 दलित बने मुसलमान

साल 1981 में तमिलनाडु के मीनाक्षीपुरम से ख़बर आती है कि 1500 दलित इस्लाम अपना लेते हैं. इस घटना ने उन्हें अंदर से इतना तोड़ दिया कि उन्होंने राजनीति से संन्यास का ऐलान कर दिया. 21 जुलाई साल 1984 में अयोध्या के वाल्मीकि भवन में श्रीराम जन्मभूमि यज्ञ समिति का गठन किया. हालांकि कुछ दिनों बाद इंदिरा गांधी की हत्या हो जाती है, ये कार्यक्रम रोक दिया जाता है. करीब 12 महीने बाद 1 नवंबर साल 1985 को धर्म संसद में महंत अवैद्यनाथ की समिति ने सरकार को अल्टीमेटम दिया, 8 मार्च साल 1986 तक राम मंदिर का ताला नहीं खुला तो फिर सरकार हिल जाएगी. लाखों संत दिल्ली कूच करेंगे...

राजीव गांधी को झुकना पड़ा था

उस वक्त UP के मुख्यमंत्री थे वीर बहादुर सिंह और वो महंत अवैद्यनाथ की कोई बात नहीं काटते थे, गोरखपुर मठ ने आवाज़ उठाई. बात अयोध्या होते हुए लखनऊ पहुंची, और आख़िरकार राजीव गांधी को झुकना पड़ा! कोर्ट के आदेश पर साल 1987 राजीव गांधी ने अयोध्या जाकर राम मंदिर का ताला खुलवाया! ये गोरखपुर मठ की बड़ी जीत बताई गई!

अवैद्यनाथ से मिले थे अजय बिष्ट

हालांकि राम मंदिर का रास्ता जब नहीं खुल रहा था, तब गोरखपुर मठ ने फैसला किया कि देश भर में जनजागरण अभियान शुरू किया जाएगा. ये वो दौर था जब आज के योगी आदित्यनाथ का नाम अजय सिंह बिष्ट हुआ करता था, वो कोटद्वार में बीएससी की पढ़ाई करते थे... साल 1990 में पहली बार ये महंत अवैद्यनाथ के पैरों में दण्डवत प्रणाम करता है! पहली मुलाकात में ही अवैद्यनाथ प्रभावित हुए, मुलाकात आगे भी होती रही...

राम मंदिर निर्माण का ऐलान

इधर अवैद्यनाथ की अध्यक्षता वाली श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन समिति ने घोषणा कर दी कि 30 अक्टूबर 1990 से अयोध्या में श्रीराम मंदिर का निर्माण शुरू किया जाएगा! उस वक्त मुलायम सिंह यादव UP के CM थे... इसी बीच लालकृष्ण आडवाणी दिल्ली से 25 सितंबर 1990 को सोमनाथ से अयोध्या तक की रथ यात्रा का ऐलान कर देते हैं. इधर योगी के गुरु अवैद्यनाथ 970 संगठनों के साथ अयोध्या में राम मंदिर के लिए मोर्चा खोल चुके थे... योगी ने अपने गुरु का हाथ पकड़ लिया... किसने सोचा था, ये लड़का एक दिन आगे चलकर यूपी का CM बन जाएगा, और जो लड़का गुरु का हाथ पकड़कर राम मंदिर आन्दोलन में शामिल हुआ था... उन्हीं के नेतृत्व में अयोध्या में भव्य राम मंदिर बनेगा?

कार सेवकों पर चली थी गोली

26 अक्टूबर 1990 में दिल्ली से अयोध्या जाते समय महंत अवैद्यनाथ को मुलायम सिंह यादव के आदेश पर गिरफ्तार कर लिया गया! मुलायम सिंह यादव ने एक सभा से ऐलान किया... “मेरे मुख्यमंत्री रहते अयोध्या में परिंदा भी पर नहीं मार सकता है” 3 दिन पहले ही 23 अक्टूबर साल 1990 में बिहार के समस्तीपुर में लालकृष्ण आडवाणी को लालू के आदेश पर गिरफ्तार कर लिया जाता है! 30 अक्टूबर साल 1990 में अयोध्या में लाखों कारसेवक प्रवेश कर गए, उसमें एक लड़का अजय सिंह बिष्ट भी था! बौखलाए मुलायम सिंह यादव ने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश दिया, और यहीं तय हो गया था...अजय सिंह बिष्ट का भविष्य...

  • अखिलेश यादव कहते हैं योगी आदित्यनाथ प्रवासी CM हैं, लेकिन वो नहीं जानते हैं कि योगी राम मंदिर आंदोलन का हिस्सा थे... उस वक्त UP और उत्तराखण्ड एक हुआ करता था... कारसेवकों पर गोलीकांड के ठीक दो साल बाद देश के प्रधानमंत्री थे पीवी नरसिंहराव, उन्होंने टेलीफोन कर गोरखपुर मठ के पीठाधीश्वर महंत अवैद्यनाथ से निवेदन किया कि आप तीन महीने का समय दीजिए, हम राम मंदिर का कोई विकल्प निकालते हैं...
  • दूसरी तरफ 30 अक्टूबर 1992 में महंत अवैद्यनाथ पांचवीं धर्म संसद में 6 दिसंबर को कारसेवा का दिन तय करते हैं, उस दिन अयोध्या में वो हुआ जिसने दुनिया भर की मीडिया को भारत में आकर कवरेज करने पर बाध्य कर दिया! ये सबकुछ अजय सिंह बिष्ट की आंखों के सामने हो रहा था... 1 साल बाद साल 1993 तक गोरखपुर मठ में अजय सिंह बिष्ट को छोटका बाबा कहा जाने लगा था... उनकी गोरखपुर मठ में पकड़ मज़बूत हो चुकी थी...
  • 4 साल पहले जो लड़का अवैद्यनाथ से पहली बार मिला था, वो लड़का गोरखपुर मठ का पीठाधीश्वर बन जाता है... 1994 में अजय सिंह बिष्ट आदित्यनाथ योगी बन जाते हैं और अब वो होने वाला होता है जिसका अंदाज़ा किसी को नहीं था!

मुलायम सिंह से लिया पंगा!

कहा जाता है गोरखपुर मठ की गद्दी पर कोई भी बैठेगा, नियम एक ही रहेगा! योगी राजनीति में आए और मुलायम सिंह यादव को आभास होने लगा था... छोटका बाबा एक दिन उनके बेटे की सियासत पर ब्रेक लगा सकता है! अब योगी आदित्यनाथ खुलकर राजनीति में आ गए! मुद्दा आज भी वही था... योगी अपने गुरु अवैद्यनाथ से ज्यादा तीखे और ज्यादा खुलकर बोलने वाले नेता बन गए! इसी दौरान उन्होंने एक हिन्दू युवा वाहिनी का गठन किया! पूर्वांचल में रहना है तो योगी-योगी कहना है का नारा चला! धर्म परिवर्तन, हिन्दू बेटियों के साथ लव जिहाद के मुद्दे पर योगी मुखर हो गए!

जब योगी को किया गया गिरफ्तार

नवरात्रि का महीना, फिर वही अक्टूबर और साल 2002 में योगी हिन्दू युवा वाहिनी का गठन करते हैं, ये पहली बार था जब मठ की तरफ से कोई ऐसा संगठन तैयार किया गया जिसमें आम जनता को जुड़ने का मौका दिया गया... देखते ही देखते ये संगठन आंदोलन में कूद गया और सिर्फ कुछ सालों बाद गोरखपुर के बाबा जिन्हें छोटका बाबा कहा जाता था... उनका कद बड़ा हो जाता है! जिस मठ की ताकत को कोई सरकार नहीं रोक पाई, राजीव गांधी को सिर झुकाना पड़ा, मठ के आगे पीवी नरसिंम्हाराव को भी सिर झुकाना पड़ा, आगे चलकर मुलायम सिंह यादव को भी मठ की ताकत के आगे सिर झुकाना पड़ा, तब योगी को गिरफ्तार करना एक ग़लत फैसला माना जाता है!

मुख्तार अंसारी को सीधी चुनौती

योगी ने जेल में बैठकर ही मुलायम सिंह यादव को एहसास करवा दिया था... मठ से पंगा लेना सियासी कुर्सी के बस की बात नहीं है! योगी का कद बढ़ता चला गया, बीजेपी इस बात से अनजान थी, लेकिन योगी मुख्तार अंसारी को उसके ज़िले में जाकर चुनौती देते हैं, योगी की कहानी में एक दिन ऐसा मोड़ आता है, जिसकी कल्पना किसी को नहीं थी! एक बात साफ है... मठ की ताकत के सामने BJP ने बार-बार सिर झुकाया है!

आडवाणी की बैठक से किनारा

साल 2006 में लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ लखनऊ में एक बैठक बुलाई, सभी ज़िले से सांसदों को बुलाया गया, लेकिन योगी आदित्यनाथ नहीं पहुंचे. योगी उसी दिन गोरखपुर में हिन्दू युवा वाहिनी के जरिए सनातन महासम्मेलन बुलाते हैं! इस बात से बीजेपी में भगदड़ मच जाती है, और योगी ने दिल्ली आलाकमान को झुकने पर मज़बूर कर दिया! हिन्दू युवा वाहिनी को लेकर योगी कहते अगर रक्षा के लिए ज़रूरत पड़ी तो हम बंदूक बांटेंगे... समाज की रक्षा करेंगे... कोई भी बहुसंख्यक समाज की बेटी के साथ लव जिहाद करेगा तो हम 10 के साथ करेंगे...

बीजेपी के नेताओं ने बनाई दूरी

योगी के बयानों से उनके ख़ास और बीजेपी के बड़े नेता दूरी बनाने लगे, यहां तक कि राजनाथ सिंह जैसे नेता भी कई बार योगी के बयान पर सफाई नहीं दे पाए, लेकिन योगी कभी रुके नहीं! कहते हैं संघर्ष करते रहना चाहिए, सफलता एक दिन ज़रूर मिलेगी! योगी ये नारा अक्सर अपनी रैलियों में उठाते, अपने लोगों के बीच वो बहुत लोकप्रिय हो गए, लेकिन बीजेपी 2007, 2012 का चुनाव हार जाती है! 2014 में मोदी सत्ता में आते हैं! 2016 में UP में विधानसभा चुनाव का प्रचार शुरू होता है! बीजेपी ने लाख कोशिश की, हर पोस्टर बैनर से योगी को साइड रखा गया.

इलेक्शन कमेटी में योगी को जगह नहीं

साल 2016 में ही बीजेपी की इलेक्शन कमेटी बनी जिसमें योगी को जगह नहीं मिली! दूसरी तरफ योगी अपनी हिन्दू युवा वाहिनी के समर्थन के साथ यूपी के कई ज़िले हिला देते हैं! योगी की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि उन्होंने चुनाव में 200 से ज्यादा रैली की, मज़बूरन बीजेपी को उनका नाम स्टार प्रचारकों की लिस्ट में डालना पड़ा. योगी हिन्दुओं को एक करने, धर्म परिवर्तन के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाने, माफिया मुसलमानों पर एक से बढ़कर एक प्रहार कर हर किसी के दिल तक पहुंच गए! लेकिन कहानी एकदम साफ है...

मठ की गद्दी की वजह से प्रसिद्धि

योगी जो कुछ हैं वो मठ की गद्दी की वजह से हैं, उनके गुरु अवैद्यनाथ ने जो किया उस लड़ाई को योगी आगे बढ़ा रहे हैं, अवैद्यनाथ ने अपने गुरु दिग्विजय नाथ की लड़ाई को आगे बढ़ाया, योगी को रोकना न तो मुलायम के बस की बात थी, ना बीजेपी उन्हें रोक पाएगी. बहुत लोग कहते हैं कि बीजेपी योगी को हटाएगी, पर सत्य ये है कि मठ के सामने किसी में खड़े होने की ख़ास हिम्मत नहीं है!

मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी खुद कहने लगे, मैं नौकरी करने नहीं आया हूं. अब उन्हीं योगी आदित्यनाथ से मुकाबला अखिलेश यादव के साथ होने वाला है! जिस मठ की तरफ मुलायम सिंह यादव कभी नहीं देख पाए, उस मठ पर अखिलेश यादव बुलडोज़र चलवाने की बात करते हैं. चुनाव से ठीक पहले योगी हिन्दुओं को एक करना जानते हैं, और ये ख़तरा किसी पार्टी के लिए बना रहता है! 

Guru Avaidyanath Yogi Adityanath Gorakhpur Math Uttar Pradesh political history

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