मिर्जापुर: बिहार में बने करिश्माई पुल को गिरते हुए तो आपने जरूर देखा होगा, लेकिन उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में इन तीन पुल की कहानी बेहद चर्चाओं में है. पहले विंध्याचल में बना पीपा पुल हवा के एक झटके में बह गया. वहीं, दूसरी ओर नेवरढिया घाट में भी पीपा पुल टूट गया. दो पुल तक मामला ठीक था. मंगलवार को भदोही को जोड़ने वाला रामपुर पीपा पुल भी टूट गया. पीपा पुल टूटने से हादसा तो नहीं हुआ, लेकिन विकास के पुख्ता दावों की पोल खुल गई. विधायकों के द्वारा दोनों पीपा पुल का उद्घाटन किया गया था, लेकिन कुछ ही दिनों बाद पीपा पुल की गुणवत्ता सामने आ गई. पुल को लेकर मिर्जापुर में सियासत गर्म है. नगर विधायक लगातार पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों की क्लास लगा रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर जनता का कहना है कि पुल की गुणवत्ता व जाम के साथ मजाक है.
केस 1- विंध्याचल में हरसिंहपुर और मां विंध्यवासिनी धाम को जोड़ने के लिए पीपा पुल बनाया गया था. हालांकि, यह पीपा पुल भी भ्रष्टाचार के भेंट चढ़ गया. पीपा पुल बनने के 15 दिनों बाद ही यह क्षतिग्रस्त हो गया. पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कड़ी आपत्ति जताई थी, जिसके बाद पुल का निर्माण किया गया. विधायक के द्वारा ही पुल का फीता काटकर शुभारंभ किया गया था. पुल को लेकर विधायक की खूब किरकिरी हुई थी. उनका पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के साथ बातचीत का वीडियो भी वायरल हुआ था.
केस 2- मीरजापुर को भदोही से जोड़ने के लिए गेगराव घाट से नेवढ़िया घाट तक पीपा पुल का निर्माण कराया गया. 2 करोड़ 45 लख रुपए की लागत से पीपा पुल बनाया गया है. हालांकि, तेज हवा चलने के बाद पुल टूट गया. यह पुल भी 14 दिनों पहले ही बना था. विधायक सुचिस्मिता ने फीता काटकर उद्घाटन किया था. दो दिनों तक बंद रहने के बाद पुल से आवा खबर शुरू हुआ है.
केस 3- रामपुर गंगाघाट से भदोही के गोपीगंज को जोड़ने वाला पीपा पुल मंगलवार को क्षतिग्रस्त हो गया. पुल सुबह ही क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे आवागमन बाधित हुआ. पुल टूटने के बाद आनन-फानन में पीडब्ल्यूडी विभाग ने दो घंटे में निर्माण पूरा करा लिया, जहां आवागमन शुरु कराया गया. यह नगर विधानसभा में आता है.
पुल टूटने के पीछे का पीडब्ल्यूडी विभाग का एक तथ्य है कि हवा की वजह से या समस्या हुई है. हालांकि, हर वर्ष हवा और आंधी चलता है, लेकिन पुल में समस्या नहीं होती थी. इस साल ही पुल टूटने की घटना पुल की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं. जनप्रतिनिधियों की उदासीनता भी उसका परिणाम है. फिलहाल अब अगला कौन सा पुल क्षतिग्रस्त होता है. यह देखना होगा. क्योंकि, लोगों का पीपा पुल से भरोसा नहीं रह गया है.
लखनऊ ब्यूरो, GLOBAL BHARAT TV