Nepal Supreme Court dealt a major blow to Balen Shah: नेपाल की सुप्रीम कोर्ट ने बालेन शाह को बड़ा झटका दिया है. पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया है. साथ ही ये टिप्पणी की है कि जब बयान ले लिए गए हैं और सबूत नष्ट होने का कोई खतरा नहीं है तो फिर इन्हें हिरासत में रखने की कोई जरूरत नहीं है.
जिसके बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या बालेन शाह की सरकार ने जल्दबाजी में और सियासी बदले की भावना से केपी शर्मा ओली को शपथ के तुरंत बाद गिरफ्तार करवाया था. नेपाल की जनता इस मुद्दे पर दो गुटों में बंटी है, पहला गुट बालेन शाह के साथ है, जबकि दूसरा केपी शर्मा ओली के साथ...पर सबसे बड़ा सवाल ये है कि क्या राजनीतिक बदले की भावना के तहत नेपाल दूसरा पाकिस्तान बनने वाला है, जैसे पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्रियों और पूर्व राष्ट्रपतियों के जेल जाने का सिलसिला जारी रहता है.
अभी शहबाज सरकार में इमरान खान जेल में हैं, वैसे ही नेपाल में हो रहा है. क्योंकि केपी शर्मा ओली के रिहाई के आदेश के बाद काठमांडु कोर्ट का एक नया फैसला आया है, जिसके मुताबिक, ''नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और पूर्व गृहमंत्री शेर बहादुर देऊबा और उनकी पत्नी आरजू राना देऊबा जो नेपाल की विदेश मंत्री रह चुकी हैं, दोनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए हैं.''
फिलहाल ये दोनों विदेश मे हैं, जानकारी के मुताबिक पहले इलाज के लिए इन दोनों ने सिंगापुर की फ्लाइट पकड़ी थी, और उसके बाद जब नेपाल में चुनाव हुए और इन्होंने हिस्सा नहीं लिया तो वापसी न करने का भी फैसला कर लिया था. उसके बाद सिंगापुर से ये दोनों पति-पत्नी हॉन्गकॉन्ग चले गए. अब नेपाल की पुलिस इंटरपोल की मदद से इन्हें वहां से लाने की तैयारी में जुट सकती है, इनके ऊपर मनी लान्ड्रिंग का आरोप है, इनके खिलाफ नेपाल के युवाओं का गुस्सा जेन जी आंदोलन के वक्त सबसे ज्यादा देखने को मिला था.
जब इनके घर में घुसकर युवाओं ने इन्हें पकड़ लिया था, और इन्हें चारों तरफ से घेरकर लात-मुक्के बरसाने शुरू कर दिए थे, अगर वहां वक्त रहते सेना के जवान नहीं पहुंचते तो शायद शेर बहादुर देऊबा को उस वक्त वहां की जनता नहीं छोड़ती...कहते हैं उसके बाद ही इन्होंने नेपाल छोड़ने का फैसला कर लिया था. पर अब बालेन शाह की सरकार इन्हें विदेश से वापस नेपाल लाकर सजा दिलाने की तैयारी में है...यानि एक तरफ देश के भीतर बदलाव की मुहिम चल रही है, तो दूसरी तरफ विदेशों में छिपे आरोपियों को भी बालेन शाह छोड़ने के मूड में नहीं हैं.
शायद यही वजह है कि वो लगातार बैठकें कर रहे हैं, बीते दिनों उन्होंने एक इमरजेंसी बैठक भी बुलाई थी, जिसमें कई मुद्दों पर मंथन हुआ, और लोगों के बीच ये चर्चा होने लगी कि अब किसकी गिरफ्तारी की बारी है क्योंकि पहली बैठक में बालेन ने केपी शर्मा को जेल भेजने वाले फैसले पर मुहर लगा दी थी. खास बात ये भी है कि बालेन शाह की सरकार ने 6 देशों से अपने राजदूतों को वापस बुलाने का भी फैसला लिया है, जिसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, डेनमार्क, दक्षिण कोरिया और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं. अब भारत में नेपाल के राजदूत शंकर प्रसाद शर्मा को भी अब वापस लौटना होगा, इन्हें एक महीने का समय दिया गया है.
कूटनीति के जानकार कहते हैं वैसे तो ये फैसला सामान्य रूटीन का भी हिस्सा हो सकता है, लेकिन नेपाल में चूंकि बदलाव की बयार बह रही है इसलिए पिछली सरकार के दौरान हुई नियुक्तियों को हटाने और इन देशों से संबंध मजबूत करने के लिए बालेन शाह ने नई नियुक्ति करने का प्लान बनाया है. हालांकि ताबड़तोड़ एक्शन के बीच सबकी निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि शपथ के 100 दिन पूरे होने पर बालेन शाह कौन-कौन से वादे पूरा करते हैं, और नेपाल की जनता के सामने अपनी क्या-क्या उपलब्धियां गिनवाते हैं, क्योंकि जनता ने उन्हें बड़ी भरोसे के साथ बड़ी कुर्सी पर बिठाया है.