सामरिक मामलों के जानकार ब्राह्म चेलानी ने बताई अमेरिका-ईरान जंग में किसकी हुई जीत?

Abhishek Chaturvedi 08 Apr 2026 10:17: PM 3 Mins
सामरिक मामलों के जानकार ब्राह्म चेलानी ने बताई अमेरिका-ईरान जंग में किसकी हुई जीत?

US-Iran War: ताबड़तोड़ हमले, गाली-गलौच की भाषा, ईरानी सेना को खत्म करने का दावा और फिर सत्ता परिवर्तन के ऐलान के बाद भी ट्रंप के हाथ क्यों कुछ नहीं लगा, ईरान कैसे इस जंग में जीत गया, और ट्रंप की 5 गलतियों ने अमेरिका के माथे पर बड़ा कलंक लगा दिया, इसकी पूरी क्रोनोलॉजी सामरिक मामलों के जानकार ब्राह्म चेलानी ने समझाई है, जिसके बारे में पहले सुनिए, फिर बताते हैं क्या सीजफायर के बाद अब ट्रंप की कुर्सी जा सकती है, और पाकिस्तान जंग रुकवाकर परेशान क्यों है...

इन 5 मोर्चों पर हुई ट्रंप की हार

  • पहली- इस युद्ध का मुख्य उद्देश्य ईरानी शासन को बदलना था, जो पूरी तरह फेल हो गया. इसके बजाय युद्ध ने ईरानी शासन को और मजबूत कर दिया. जो सरकार पहले आंतरिक दबाव में थी, उसे नया जीवन मिल गया और उसकी पकड़ सत्ता पर और मजबूत हो गई.
  • दूसरी- युद्ध से पहले होर्मुज स्ट्रेट खुला था, लेकिन अब ईरान स्वेज नहर की तरह यहां भी ट्रांजिट फीस वसूलने की स्थिति में है. इससे ईरान को आर्थिक मजबूती मिल गई है.
  • तीसरी- युद्ध के अंतरराष्ट्रीय आर्थिक नुकसान भारी और लंबे समय तक रहने वाले हैं. गल्फ और ईरान में ऊर्जा बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान का असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा.
  • चौथी- ट्रंप ने नाटो सहयोगियों के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे साझेदारों पर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई. यानि अमेरिका की वैश्विक किरकिरी हुई.
  • पांचवीं- युद्ध ने न सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप की व्यक्तिगत साख को नुकसान पहुंचाया, बल्कि अमेरिका की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठे. ट्रंप के हाथ में सिर्फ तबाही के मलबे के अलावा कुछ नहीं बचा.

शायद यही वजह है कि पहले युद्ध की वजह से अमेरिका को हो रहे नुकसान के खिलाफ 80 लाख लोग सड़कों पर उतरे थे, और अब 85 डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाने की मांग की है. उनका दावा है कि सीजफायर का फैसला काफी देर से लिया गया इसलिए 25वें संविधान संशोधन के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अयोग्य घोषित कर पद से हटाया जा सकता है.

इसकी आशंका इसलिए भी जताई जाने लगी है क्योंकि जब जंग का ऐलान हुआ था, और नेतन्याहू ट्रंप से सीक्रेट मीटिंग करने पहुंचे थे, तो उस वक्त उपराष्ट्रपति जेडी वेंस वहां मौजूद नहीं थे, और उन तक जब ये ख़बर पहुंची तो वो शुरुआत में युद्ध के खिलाफ थे. अमेरिका के बड़े-बड़े अधिकारी भी इस युद्ध के परिणाम को लेकर सवाल पूछ रहे थे, लेकिन ट्रंप ने व्हाइट हाउस के अधिकारियों से ज्यादा इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू की बातों पर ज्यादा भरोसा किया, जिन्होंने कहा था ये हमले का सही वक्त है, अगर हमला नहीं किया तो खतरा ज्यादा हो सकता है. चार चरणों में इस ऑपरेशन को पूरा किया जा सकता है.

  • पहले चरण में खामेनेई और टॉप लीडरशिप को खत्म करेंगे
  • दूसरे चरण में ईरान की सैन्य ताकत को मिट्टी में मिला देंगे
  • तीसरे चरण में ईरान के भीतर अलग-अलग जगह विद्रोह करवाएं
  • चौथे चरण में सरकार बदलकर वहां नई व्यवस्था खड़ी कर देंगे

ट्रंप को ये सारी बातें वीडियो गेम की तरह लग रही थीं, और पहले चरण में इजरायल ने इसीलिए सीधा खामेनेई को निशाना भी बनाया, पर ईरान ने इनकी पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दिया, वहां की सेना ने जिस हिसाब का जवाब दिया, उसकी उम्मीद न ट्रंप ने की थी, न नेतन्याहू ने...नतीजा आज ट्रंप अपने ही घर में घिर चुके हैं, और नेतन्याहू इजरायल की जनता को ये नहीं बता पा रहे कि इस युद्ध में नुकसान के अलावा उन्हें क्या हासिल हुआ. क्योंकि ईरान अभी भी ये दावा कर रहा है कि संवर्धित परमाणु उसके पास ही है, उसने सीजफायर की शर्तों में भी ये बात लिखी है...

हद तो तब हो जाती है जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पोस्ट को लोग पहले से ड्राफ्ट और अमेरिका के आदेश पर लिखा हुआ बताते हैं, और ईरान साफ कहता है हमें पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, चीन और रूस गारंटी दें कि भविष्य में अमेरिका-इजरायल ऐसा नहीं करेंगे. यानि ऐसा लगता है जैसे, ईरान अभी भी जंग को तैयार है, पर ट्रंप ने पांव पीछे लिए हैं....

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