Mohammad Deepak: उत्तराखंड के देहरादून के जिम ओनर दीपक कुमार, जिन्हें अब लोग मोहम्मद दीपक के नाम से जानते हैं, को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिल गई है. कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज FIR की आगे की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है.
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सोमवार को दीपक की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए FIR से जुड़ी सभी कार्यवाहियों पर स्टे दे दिया. साथ ही उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें उन्हें इस मामले पर सोशल मीडिया पोस्ट या सार्वजनिक बयान देने से रोका गया था.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
फरवरी में कोटद्वार में बजरंग दल के सदस्यों ने एक मुस्लिम दुकानदार के दुकान के नाम में बाबा शब्द इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताई थी. उस समय दीपक ने दुकानदार का साथ दिया और कहा था, ''मेरा नाम मोहम्मद दीपक है.'' इस घटना का वीडियो वायरल हो गया था और वह सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए.
इसके बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज हो गई. वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने दीपक की ओर से दलील दी कि वे खुद एक अच्छे नागरिक की तरह घटना की शिकायत दर्ज कराने गए थे, लेकिन उनकी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, उल्टे उनके खिलाफ केस बना दिया गया.
सिंघवी ने कोर्ट से पूछा, ''एक गुड समैरिटन के खिलाफ इस तरह की शिकायत कैसे हो सकती है?'' उन्होंने यह भी बताया कि दंगों संबंधी धारा 191 भी लगाई गई थी, जो बाद में हटा दी गई क्योंकि उसकी शर्तें पूरी नहीं होती थीं. दीपक ने हाईकोर्ट में FIR रद्द करने की मांग की थी, लेकिन हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप से इनकार कर दिया और जांच में सहयोग करने को कहा. साथ ही सोशल मीडिया पर बयान न देने का निर्देश भी दिया. इसके खिलाफ वे सुप्रीम कोर्ट पहुंचे.
घटना के बाद दीपक को काफी सार्वजनिक समर्थन मिला. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उनके जिम को मोहब्बत की दुकान बताया और मेंबरशिप लेने की बात कही. CPI(M) सांसद जॉन ब्रिटास भी उनके जिम पहुंचे. 15 सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ताओं ने सामूहिक रूप से उनके जिम की सालाना मेंबरशिप खरीदी, क्योंकि घटना के बाद उनके बिजनेस को भारी नुकसान हुआ था.