नई दिल्ली: केरल के प्रभावशाली इस्लामिक स्कॉलर और समास्था केरल जमिय्यतुल उलमा के महासचिव कंथापुरम एपी अबूबकर मुसलियार (95) ने महिलाओं को लेकर एक बार फिर विवादित बयान देकर सियासी और सामाजिक हलकों में बवाल खड़ा कर दिया है. रविवार को कोच्चि में आयोजित एक इस्लामिक सम्मेलन में बोलते हुए मुसलियार ने कहा कि महिलाओं को सार्वजनिक मंचों पर लाने से “बड़ी तबाही” मच सकती है. इसीलिए इस्लाम ने महिलाओं के लिए पर्दा अनिवार्य किया है.
उन्होंने दावा किया कि पवित्र कुरान में कहा गया है कि महिलाओं को घरों तक सीमित रहना चाहिए और सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आना चाहिए. ये टिप्पणियां उस विवादित सर्कुलर के कुछ दिनों बाद आई हैं, जिसमें समास्था केरल जमिय्यतुल उलमा (कान्थापुरम गुट) ने निर्देश दिया था कि धार्मिक कार्यक्रमों में महिलाएं पुरुषों के साथ मंच साझा न करें और सार्वजनिक स्थानों पर उनके साथ न दिखें.
मुसलियार ने कहा कि पिछले 100 सालों से धार्मिक विद्वान यही सिखाते आए हैं और इसी वजह से देश की महिलाओं ने अपनी इज्जत और गरिमा बनाए रखी है. उन्होंने यह भी कहा कि आलोचना के बावजूद विद्वानों का फर्ज है कि वे इस मुद्दे पर बोलें और वे बोलते रहेंगे.
विपक्षी दल सीपीआई(एम) ने इन टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है. पार्टी की नेता पीके श्रीमती ने इन्हें “अपमानजनक और अपमानपूर्ण” बताया तथा तुरंत वापस लेने की मांग की. उन्होंने कहा कि इस्लाम महिलाओं के साथ सम्मान और विचार के साथ पेश आने की शिक्षा देता है.
गौरतलब है कि मुसलियार पहले भी महिलाओं को लेकर विवादित बयान दे चुके हैं. 2015 में उन्होंने जेंडर इक्वेलिटी को इस्लाम के खिलाफ बताया था, 2019 में सीएए विरोध में महिलाओं के सड़क पर उतरने का विरोध किया था और 2025 में पुरुष-महिलाओं के साथ फिटनेस प्रोग्राम पर भी आपत्ति जताई थी.