नई दिल्ली : नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही का ऐसा मंजर दिखाया है, जिसे देखकर हर कोई सहम गया है. अब तक 929 लोगों की मौत की खबर है, जबकि करीब 4,200 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. बड़ी संख्या में बरामद शवों की पहचान नहीं हो सकी है. हालात इतने खराब हैं कि कई शव सड़ने लगे हैं.
शवों की पहचान और उन्हें सुरक्षित रखने में आ रही मुश्किलों के बीच नेपाल सरकार ने अब अज्ञात शवों को दफनाना शुरू कर दिया है. पिछले दो दिनों में करीब 196 शव दफनाए जा चुके हैं. चितवन के देवघाट के जंगलों में सैकड़ों कब्रें खोदी गई हैं, जहां पहचान नहीं हो पाने वाले शवों को दफनाया जा रहा है.
यह फैसला प्रशासन के लिए मजबूरी जरूर है, लेकिन उन परिवारों के लिए बेहद दर्दनाक है, जिनके अपने अभी तक लापता हैं. उन्हें यह भी पता नहीं कि उनका परिवार का सदस्य जीवित है या आपदा की भेंट चढ़ चुका है.
नेपाल की मौजूदा स्थिति की तुलना 2013 की केदारनाथ आपदा से भी की जा रही है. केदारनाथ त्रासदी के वर्षों बाद भी कई लोग लापता माने जाते हैं. आशंका है कि नेपाल में भी बड़ी संख्या में लापता लोगों का सुराग शायद कभी नहीं मिल पाएगा.
अगर भविष्य में डीएनए जांच के जरिए दफनाए गए शवों की पहचान हो भी जाती है, तो कई परिवार अपने प्रियजन का आखिरी चेहरा तक नहीं देख पाएंगे. प्राकृतिक आपदा से हुई मौत का यह दर्द अब उन परिवारों के लिए जिंदगीभर की त्रासदी बन सकता है.