काठमांडू: नेपाल और तिब्बत में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड में मौतों का आंकड़ा 900 पार कर गया है. इस त्रासदी के बीच आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने हिमालय क्षेत्र के लिए पांच देशों का एक साझा बोर्ड बनाने की वकालत की है. काठमांडू में नेपाल के लिए आयोजित एक सॉलिडैरिटी इवेंट में बोलते हुए सद्गुरु ने कहा कि हिमालय को राजनीतिक सीमाओं में बांटकर नहीं, बल्कि एक जुड़े हुए पारिस्थितिकी तंत्र के रूप में देखना चाहिए.
उन्होंने भारत, चीन, पाकिस्तान, नेपाल और भूटान को शामिल करते हुए फाइव-नेशन हिमालयन बोर्ड बनाने का सुझाव दिया, ताकि आपदाओं से निपटने में बेहतर समन्वय हो सके. उन्होंने नेपाल प्रधानमंत्री के आपदा राहत कोष में 1 करोड़ रुपए दान देने की घोषणा भी की.
दिव्य कारण न बताएं, हकीकत को समझें
सद्गुरु ने लोगों से अपील की कि नेपाल की बाढ़ को दिव्य कारण या रहस्यमय संभावना न बताएं. उन्होंने कहा कि ऐसे स्पष्टीकरण से पीड़ितों के दर्द की हकीकत कम हो जाती है. इस त्रासदी में जान गंवाने वालों की याद में 3 सितंबर को कोयंबटूर स्थित ईशा योग सेंटर में “काल भैरव कर्म” नामक विशेष मृत्यु अनुष्ठान कराने की भी घोषणा की. यह अनुष्ठान प्राकृतिक या अप्राकृतिक मौत से गुजरे लोगों के लिए शांति और सहज संक्रमण के लिए किया जाता है.
ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्री लापता
सद्गुरु ने बताया कि बाढ़ में ईशा फाउंडेशन के कैलाश तीर्थयात्रा समूह के 77 सदस्य अभी भी लापता हैं. समूह तिब्बत-नेपाल सीमा के पास से लौट रहा था जब आपदा आई. उन्होंने याद किया कि समूह के लीडर प्रवीण ने बताया था कि सभी सदस्य सुबह 9:05 बजे ही इमिग्रेशन सेंटर पहुंच गए थे. बाढ़ की पहली तस्वीरें देखने पर पानी और मलबा करीब 40 फीट ऊंचा लग रहा था.
सद्गुरु ने उस समय सोचा था कि सामान-पासपोर्ट खो सकते हैं, लेकिन जान तो बच जाएगी. लेकिन अब तक 77 तीर्थयात्रियों का कोई पता नहीं चल पाया है. समूह में 19 देशों के तीर्थयात्री शामिल थे. ईशा फाउंडेशन ने भारत, चीन और नेपाल के दूतावासों से मदद मांगी है.