काठमांडु: नेपाल-चीन सीमा पर रसुवा जिले में बुधवार को आई भयानक बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचा दी है. इस आपदा के कारण सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले करीब 400 तीर्थयात्री रसुवागढ़ी इलाके में फंस गए हैं. उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया है.
काठमांडू स्थित टच कैलाश ट्रेवल्स एंड टूर्स के एमडी बासु कुमार अधिकारी ने बताया कि बुधवार को 93 नेपाली नागरिकों सहित कुल लगभग 390 श्रद्धालुओं को चीन की सीमा पार करनी थी. दोपहर 3 बजे तक इनमें से कुछ ही लोगों से संपर्क हो सका, जबकि अधिकांश यात्रियों की कोई सटीक जानकारी नहीं मिल पाई है. ये तीर्थयात्री विभिन्न ट्रेवल एजेंसियों के माध्यम से यात्रा पर निकले थे, जिनमें सम्राट टूर्स, ट्रेकर्स सोसाइटी, हिमालयन ग्लेशियर, लीफ हॉलीडेज सहित कई एजेंसियां शामिल हैं.
ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष सागर पांडे ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में फंसे तीर्थयात्रियों से संपर्क स्थापित करने और उनकी स्थिति का सही आकलन करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं. नेपाल सेना के अनुसार, पानी अचानक बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और स्याफ्रुबेसी इलाकों में भारी नुकसान हुआ. वाहन, सामान और संपत्ति बह गई. हाल में बना एक पुल भी बह गया. यह क्षेत्र तिब्बत सीमा से करीब 125 किलोमीटर दूर है. बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से अधिक था.
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा के नदी किनारे रहने वाले लोगों से अत्यधिक सतर्क रहने की अपील की है. प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि बचाव और राहत अभियान तेज करने के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवान तैनात किए गए हैं. उच्च स्तरीय बैठक भी बुलाई जा रही है.
नेपाल सेना ने त्रिशूली नदी के आसपास खोज एवं बचाव अभियान के लिए दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं. एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर को आपातकालीन चिकित्सा दल के साथ जिला अस्पताल की ओर रवाना किया गया है. नुकसान का पूरा ब्योरा अभी जुटाया जा रहा है.