नई दिल्ली : नेपाल ने भारत और चीन के बीच संतुलित विदेश नीति का संकेत देते हुए किसी एक देश को दूसरे से ज्यादा महत्व देने से इनकार किया है. नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने कहा कि भारत और चीन, दोनों के साथ काठमांडू के संबंध अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं और नेपाल किसी एक को दूसरे से बेहतर चुनने की नीति नहीं अपनाना चाहता. उनका यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब हिमालयी देश में भारत और चीन दोनों अपना आर्थिक और रणनीतिक प्रभाव मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं.
खनाल ने 7 अगस्त को चीन-भारत-नेपाल त्रिपक्षीय संबंधों पर आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में कहा था कि नेपाल भारत और चीन के साथ अपने लंबे समय से चले आ रहे द्विपक्षीय संबंधों को स्वतंत्र रूप से मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने इसके लिए संप्रभु समानता, आपसी सम्मान और पारस्परिक लाभ को आधार बताया. विदेश मंत्री के मुताबिक, दोनों पड़ोसी नेपाल के लिए व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, पर्यटन, तकनीक और आर्थिक विकास के लिहाज से बड़े अवसर हैं.
इसी बीच प्रधानमंत्री बालेन्द्र ‘बालेन’ शाह ने भी अपनी शुरुआती विदेश नीति में बदलाव के संकेत दिए हैं. सत्ता संभालने के बाद लंबे समय तक उन्होंने काठमांडू में तैनात विदेशी राजदूतों के साथ व्यक्तिगत मुलाकात से दूरी बनाए रखी थी,. लेकिन 10 अगस्त को उन्होंने भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव से पहली वन-टू-वन मुलाकात की. बातचीत में नेपाल-भारत संबंधों, विकास साझेदारी और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई.
इसी दिन शाह ने चीनी राजदूत से भी अलग मुलाकात की. दोनों देशों ने शाह को अपने-अपने देश आने का निमंत्रण भी दिया. इन घटनाक्रमों से साफ है कि बालेन सरकार भारत और चीन के बीच किसी एक खेमे में जाने के बजाय दोनों के साथ समानांतर संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रही है. नेपाल के लिए यह संतुलन आर्थिक विकास और रणनीतिक स्वायत्तता, दोनों लिहाज से अहम माना जा रहा है.