प्रतापगढ़ : उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है. उप कृषि निदेशक अश्वनी सिंह ने मामले को लेकर साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई है. कृषि विभाग ने पुलिस को करीब 3 लाख 80 हजार फर्जी और संदिग्ध किसानों की सूची भी सौंपी है. अधिकारियों के मुताबिक, इस पूरे मामले में 60 करोड़ रुपये से अधिक के घपले की आशंका है.
बताया जा रहा है कि कुंडा तहसील की लॉगिन आईडी के जरिए डायरेक्ट एंट्री का दुरुपयोग करते हुए बड़ी संख्या में फर्जी पंजीकरण कराए गए. विभाग के अनुसार प्रतापगढ़ में कुल करीब 4 लाख 45 हजार फर्जी पंजीकरण डायरेक्ट एंट्री के माध्यम से किए गए हैं. इनमें से 3 लाख 80 हजार संदिग्ध और फर्जी किसान आईडी की पहचान कर उन्हें डिलीट किया जा चुका है.
जांच में सामने आया है कि फर्जी पंजीकरण कराने वालों में गैर जनपद के लोग, नाबालिग और प्रदेश से बाहर रहने वाले लोगों के नाम भी शामिल हैं. सबसे ज्यादा संदिग्ध पंजीकरण कुंडा तहसील क्षेत्र से सामने आने की बात कही जा रही है. उप कृषि निदेशक के मुताबिक, डायरेक्ट एंट्री के जरिए नियमों को दरकिनार कर किसानों का पंजीकरण कराया गया और सरकारी योजना की रकम गलत तरीके से हासिल की गई.
मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है. एफआईआर दर्ज होने के बाद साइबर थाना पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब फर्जी पंजीकरण कराने वाले लोगों, इस्तेमाल की गई लॉगिन आईडी और धनराशि के लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है. जांच पूरी होने के बाद घोटाले की वास्तविक रकम और इसमें शामिल लोगों की संख्या स्पष्ट होने की उम्मीद है.