नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के अमेरिका दौरे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. भागवत इस महीने के अंत में अमेरिका जाने वाले हैं. इससे पहले ‘अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अमेरिकी आयोग’ (USCIRF) ने उनके इस दौरे का सार्वजनिक रूप से विरोध किया है. आयोग ने अमेरिकी सरकार से मांग की है कि धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने वाले आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाए जाएं.
USCIRF अमेरिकी लेजिस्लेटिव ब्रांच की एक एजेंसी है, जिसे 1998 में बनाया गया था. इसके सदस्यों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और शीर्ष सांसद करते हैं, हालांकि यह स्वतंत्र रूप से काम करने का दावा करती है.
आयोग के चीफ आसिफ महमूद ने बयान जारी कर अमेरिकी प्रशासन से संघ के खिलाफ कदम उठाने की मांग की. उन्होंने कहा, “भारत के प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य हैं. यह भारत का एक बड़ा संगठन है और जिसके कुछ संगठनों पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, ईसाई और मुस्लिम पर हमले करने के आरोप हैं. अब RSS प्रमुख मोहन भागवत अमेरिका की यात्रा की योजना बना रहे हैं.”
आयोग के एक अन्य सदस्य जीन मिल्स ने कहा कि आरएसएस नेताओं को, भले ही वे भारत सरकार से जुड़े हों, उच्च स्तरीय बैठकों या राजनयिक शिष्टाचार से सम्मानित नहीं किया जाना चाहिए. USCIRF ने अमेरिकी सरकार से आरएसएस सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने पर ध्यान देने की बात कही.
यह पहली बार नहीं है जब USCIRF ने भारत विरोधी रुख अपनाया है. पहले भी इस एजेंसी ने अमेरिकी सरकार से विवादित सिफारिशें की थीं. तब आयोग ने भारत की कुछ खुफिया एजेंसियों और संघ के खिलाफ प्रतिबंध लगाने तथा भारत को “विशेष चिंता वाले देश” का दर्जा देने का सुझाव दिया था.
भारत सरकार ने कई बार आयोग की ऐसी रिपोर्टों को पूरी तरह खारिज किया है. विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि भारत 1.4 अरब लोगों का देश है, जहां दुनिया के सभी धर्मों के लोग शांति और सद्भावना के साथ रहते हैं. मंत्रालय ने आयोग के रुख को एक “खास एजेंडा” और भारत के बहुसांस्कृतिक समाज को बदनाम करने की कोशिश करार दिया था. भारत ने यहां तक कहा था कि USCIRF को ही चिंता वाला संगठन घोषित कर दिया जाना चाहिए.