संयुक्त राष्ट्र: भारत और इजराइल ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की प्रथम समिति में पाकिस्तान और बेलारूस द्वारा प्रायोजित क्षेत्रीय एवं उप-क्षेत्रीय स्तर पर पारंपरिक हथियारों के नियंत्रण संबंधी मसौदा प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. यह प्रस्ताव 180 वोटों के समर्थन में पारित हो गया, जबकि किसी भी देश ने मतदान से परहेज नहीं किया. 193 सदस्यीय निकाय में केवल भारत और इजराइल ने ही इसका विरोध किया.
प्रस्ताव का शीर्षक ‘सामान्य और पूर्ण निरस्त्रीकरण: क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तरों पर पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण’ है. इसमें कहा गया है कि शीत युद्ध के बाद के दौर में शांति और सुरक्षा के लिए अधिकांश खतरे एक ही क्षेत्र में स्थित देशों के बीच उत्पन्न होते हैं, इसलिए पारंपरिक हथियारों का नियंत्रण मुख्य रूप से क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय स्तर पर किया जाना चाहिए. प्रस्ताव क्षेत्रीय शांति को मजबूत करने वाले समझौतों को बढ़ावा देने और सैन्य बलों को न्यूनतम स्तर पर रखने की बात भी करता है.
भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनमोल शेर बेदी ने मतदान के बाद स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि पारंपरिक हथियार नियंत्रण एक वैश्विक मुद्दा है. उन्होंने कहा, “हम पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि इसे मुख्य रूप से क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय संदर्भ में आगे बढ़ाया जाना चाहिए.” भारत का कहना है कि देशों की सुरक्षा संबंधी चिंताएं क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं होतीं. क्षेत्रीय रक्षा संतुलन की अवधारणा अवास्तविक है.
भारत ने प्रस्ताव में यूएन निरस्त्रीकरण आयोग से क्षेत्रीय समझौतों के लिए सिद्धांत तैयार करने के अनुरोध पर भी सवाल उठाया, क्योंकि आयोग ने पहले ही 1993, 1999 और 2017 में इस विषय पर सहमति वाले परिणाम अपनाए हैं. भारत ने दक्षिण एशिया के संदर्भ में पारंपरिक हथियार नियंत्रण प्रस्तावों का उल्लेख करने वाले एक अलग पैराग्राफ के खिलाफ भी मतदान किया. यह भारत की पूर्व स्थिति के अनुरूप है. इजराइल भी भारत के साथ इस प्रस्ताव का विरोध करने वाला एकमात्र देश रहा.