वॉशिंगटन: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सैयद ने मिशिगन से सीनेट सीट जीतकर इतिहास रच दिया है. वे अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं. उन्होंने रिपब्लिकन नेता माइक रोजर्स को कड़े मुकाबले में हराया. इस जीत का भारत से भी गहरा संबंध है, क्योंकि उनकी पत्नी का परिवार कर्नाटक के भटकल से जुड़ा है.
ऐतिहासिक जीत मिली
अब्दुल अल-सैयद, जो पहले जन स्वास्थ्य अधिकारी रहे हैं, ने यूनिवर्सल हेल्थकेयर (सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा) और सरकारी जवाबदेही के एजेंडे पर प्रचार किया. मिशिगन की यह सीट डेमोक्रेट्स के लिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि वे सीनेट पर नियंत्रण हासिल करने की कोशिश कर रहे थे. अल-सैयद की जीत से डेमोक्रेट्स को बड़ी मजबूती मिली है.
भारत से रहा है जुड़ाव
अल-सैयद की पत्नी डॉ. सारा जुकाकू एक मनोचिकित्सक हैं. उनका परिवार कर्नाटक के भटकल से ताल्लुक रखता है. सारा, जुकाकू शमसुद्दीन की पोती हैं, जो तत्कालीन मैसूर रियासत में वित्त उप-मंत्री रह चुके थे. परिवार के ज्यादातर सदस्य अब बेंगलुरु में बस चुके हैं. एक इंटरव्यू में अल-सैयद ने कहा था, ''देखिए, मेरी शादी एक दक्षिण भारतीय परिवार में हुई है और मुझे 20 साल हो चुके हैं. अब मैं पूरी तरह से इसमें घुल-मिल गया हूं. सच कहूं तो, शायद मैं अरब होने से ज्यादा भारतीय हूं.'' दोनों की मुलाकात मिशिगन यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान हुई थी. अल-सैयद रोड्स स्कॉलर भी रहे हैं.
राजनीतिक सफर
अल-सैयद की शुरुआत चिकित्सा के क्षेत्र से हुई. बाद में उन्होंने महसूस किया कि राजनीतिक व्यवस्था की कमियां ही लोगों की स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन रही हैं. इसके बाद उन्होंने जन स्वास्थ्य और सरकारी प्रशासन में करियर बनाया. वे वेन काउंटी डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ के निदेशक भी रह चुके हैं. उनका मुख्य जोर इस बात पर रहा कि स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए सुलभ होनी चाहिए और सरकार आम नागरिकों के लिए काम करे.
ट्रंप ने जताया विरोध
चुनाव प्रचार के दौरान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अल-सैयद का कड़ा विरोध किया था. ट्रंप ने उन्हें “जिहादी” कहा और आरोप लगाया कि वे मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े हैं तथा शरिया कानून लागू करना चाहते हैं. अल-सैयद ने इन आरोपों को खारिज किया. इसके बावजूद उन्होंने जीत हासिल की. इस ऐतिहासिक जीत को कई लोग अमेरिकी राजनीति में विविधता का प्रतीक मान रहे हैं. अल-सैयद अब अमेरिकी सीनेट में मुस्लिम समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले पहले व्यक्ति बन गए हैं.