वॉशिंगटन: अमेरिका में मंगलवार 3 नवंबर को हुए मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी को एकतरफा जीत मिली है. शुरुआती प्रोजेक्शन और लाइव काउंटिंग के अनुसार, डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट पर नियंत्रण हासिल कर लिया है. यह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के आधे हिस्से के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है और भारत सहित कई देशों के लिए उम्मीद किरण है, क्योंकि ड्रंप की नीतियों के कारण न सिर्फ अमेरिका को नुकसान हुआ है, बल्कि भारत जैसे विकासशील देशों पर भी गहरा असर पड़ा है. दावा किया जा रहा है कि मध्यावधि चुनाव में हार मिलने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नीतियों में बदलाव करेंगे, जिसका फायदा भारत जैसे देशों को होगा.
चुनाव परिणाम की बात की बात करें तो, CNN, BBC, Reuters, AP के प्रोजेक्शन के मुताबिक, हाउस में डेमोक्रेट्स बहुमत के आंकड़े (218) को पार कर रही हैं. सीनेट में भी उनकी संख्या 50 के आसपास पहुंच चुकी है और कई सीटों पर आगे चल रही हैं, जिससे बहुमत पक्का माना जा रहा है. रिपब्लिकन पार्टी अपने कई पारंपरिक गढ़ों में हार का सामना कर रही है.
प्रमुख नतीजे और ऐतिहासिक जीतें
डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया
प्रारंभ में गुस्से में दिखने वाले ट्रंप ने बाद में नतीजे स्वीकार कर लिए. उन्होंने कहा कि वे मध्यावधि चुनाव के परिणामों को मानेंगे और डेमोक्रेट्स के साथ काम करने को तैयार हैं. साथ ही उन्होंने दावा किया कि अगर मैं खुद चुनावी मैदान में होता तो लैंडस्लाइड जीत मिलती. ट्रंप ने हार के लिए खुद के बैलेट पर न होने को जिम्मेदार ठहराया.
प्रभाव और आगे क्या?
यह चुनाव ट्रंप के पहले दो वर्षों के कामकाज का लिटमस टेस्ट माना जा रहा था. दोनों सदनों पर डेमोक्रेटिक नियंत्रण से ट्रंप के बाकी दो वर्षों का एजेंडा मुश्किल हो सकता है. डेमोक्रेट्स जांच, निगरानी और संभावित महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं. मूल्य वृद्धि, ईरान युद्ध और अन्य मुद्दों पर मतदाताओं का असंतोष इस नीली लहर का मुख्य कारण माना जा रहा है. नतीजे अभी भी आ रहे हैं और कुछ सीटों की अंतिम गिनती बाकी है. स्थिति में बदलाव संभव है, लेकिन डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति स्पष्ट है.