नई दिल्ली: हाल ही में जहां भारत में हफ्ते में 70-70 घंटे काम करने की बहस छिड़ी हुई थी, वहीं सोशल मीडिया पर जापान के कार्यबल (Work Culture) से जुड़ा एक भारतीय शख्स का अनुभव तेज़ी से वायरल हो रहा है। टोक्यो में पिछले 10 सालों से एक जापानी बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में कार्यरत भारतीय नागरिक उत्कर्ष गर्ग ने जापानी वर्क कल्चर का एक ऐसा सच उजागर किया है, जिसने भारतीय कॉरपोरेट जगत में तहलका मचा दिया है।
"15 मिनट ज्यादा काम... तो सीधा ओवरटाइम!"
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' और इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए अपने वीडियो में उत्कर्ष गर्ग ने बताया कि जापान में कर्मचारियों के समय की बेहद कद्र की जाती है। यदि कोई कर्मचारी अपने तय शिफ्ट टाइम (Standard Shift) से 15 मिनट या उससे अधिक समय तक रुककर काम करता है, तो कंपनी उसे 15-15 मिनट के स्लॉट में जोड़कर पूरा 'ओवरटाइम पे' (Overtime Allowance) देती है।
उत्कर्ष के मुताबिक, जापान के श्रम कानून (Labor Standard Law) इतने सख्त हैं कि कंपनियां कर्मचारियों से जबरन काम कराने से डरती हैं। यदि किसी कर्मचारी को देर तक रुकना पड़े, तो उसके लिए मैनेजर से पूर्व अनुमति (Overtime Request) लेनी होती है और कंपनी उसके बदले पूरा भुगतान करती है।
वर्क-लाइफ बैलेंस और 'सर्विस ओवरटाइम' पर रोक
भारतीय कॉरपोरेट कल्चर में जहां 'देर तक बैठने' को डेडिकेशन (समर्पण) माना जाता है, वहीं जापानी कंपनियों में इसे 'अक्षम प्रबंधन' (Poor Management) के रूप में देखा जाता है। जापान में बिना पैसे दिए काम कराने यानी 'सर्विस ओवरटाइम' (Service Overtime) को अवैध माना जाता है।
उत्कर्ष ने अपने पोस्ट में लिखा कि कंपनियां यह सुनिश्चित करती हैं कि कर्मचारी समय पर घर जाएं ताकि वे मानसिक रूप से तनावमुक्त रहें। अगर कोई लगातार ओवरटाइम करता है, तो कंपनी का HR विभाग खुद आकर जांच करता है कि कर्मचारी पर काम का ज्यादा बोझ तो नहीं है।