मुंबई/छत्रपति संभाजीनगर: महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने दावा किया है कि खुल्दाबाद में स्थित मुगल शासक औरंगजेब की कब्र जल्द हटाई जाएगी. उन्होंने कहा कि कब्र हटाने की तारीख तय हो चुकी है, लेकिन फिलहाल इसका खुलासा नहीं किया जाएगा. राणे ने यह बात छत्रपति संभाजीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान कही. राणे ने कहा, ''हम उस कचरे को यहां नहीं चाहते. जो इसे पसंद करते हैं, वे इसे अपने पाकिस्तान ले जा सकते हैं. हम इसे यहां नहीं रखना चाहते. लोग पूछेंगे कि यह कब होगा, मैं तारीख नहीं बताऊंगा. फडणवीस जानते हैं कि यह खबर कब देनी है.''
उन्होंने यह भी कहा कि औरंगजेब की कब्र को महाराष्ट्र की पहचान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए. यह पहली बार नहीं है जब राणे ने इस कब्र को हटाने की मांग दोहराई है. मार्च 2025 में भी उन्होंने और हिंदुत्व संगठनों ने इसे हटाने की मांग की थी, जिसके बाद सुरक्षा बढ़ाई गई थी.
औरंगजेब की कब्र का इतिहास
औरंगजेब की मौत 3 मार्च 1707 को 88 वर्ष की उम्र में हुई थी. उन्होंने लगभग 49 साल तक शासन किया. इतिहासकारों के अनुसार, उन्होंने खुद सादगी के साथ दफन होने की इच्छा जताई थी. इसलिए उनकी कब्र खुले आसमान के नीचे है और शानदार मकबरा नहीं बना. उन्हें महाराष्ट्र के औरंगाबाद के पास खुल्दाबाद में सूफी संत शेख जैनुद्दीन शिराजी की दरगाह के पास दफनाया गया था. तीन सदी से अधिक समय से यह कब्र वहीं मौजूद है.
नितेश राणे के दावे के बावजूद इसे हटाना आसान नहीं है. यह स्थल आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के तहत संरक्षित स्मारक है. Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act के तहत किसी संरक्षित स्मारक को तोड़ना, नुकसान पहुंचाना या हटाना गैरकानूनी है. इसे संरक्षित सूची से हटाने का अधिकार सिर्फ केंद्र सरकार के पास है. राज्य सरकार अकेले यह फैसला नहीं ले सकती.
मार्च 2025 में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा था कि मांग पर सहमति हो सकती है, लेकिन कार्रवाई कानून के दायरे में ही करनी होगी. यह मुद्दा लंबे समय से महाराष्ट्र में राजनीतिक विवाद का विषय रहा है. हिंदुत्व संगठनों ने इसे ''दर्द और गुलामी का प्रतीक'' बताते हुए हटाने की मांग की है, जबकि कुछ अन्य पक्षों ने ऐतिहासिक स्मारक के रूप में इसकी रक्षा की बात कही है. फिलहाल राणे के बयान ने एक बार फिर इस विवाद को चर्चा में ला दिया है.