जयपुर: एक मां जो अपनी पूरी जिंदगी सिर्फ इसलिए खपा देती है ताकि उसकी औलाद का भविष्य संवर सके। एक मां जो अपने पति की मौत के बाद सिर्फ इसलिए सरकारी नौकरी जॉइन करती है ताकि उसका 16 साल का मानसिक रूप से दिव्यांग बेटा लावारिस न हो जाए। लेकिन उसी कोख से जन्मी 24 साल की बेटी आयुषी शर्मा, कानून (वकालत) की पढ़ाई करते-करते इतनी शातिर अपराधी बन जाएगी कि करोड़ों की जमीन और उसी सरकारी नौकरी के लिए अपनी ही मां को बेरहमी से कुचलवाकर मार डालेगी, इसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। जयपुर से सामने आई निरज शर्मा हत्याकांड की यह कहानी न सिर्फ दिल दहला देने वाली है, बल्कि मां-बेटी के पवित्र रिश्ते को भी शर्मसार करती है।
दिव्यांग बेटे के लिए मां ने संभाली थी नौकरी
इस खौफनाक दास्तां की शुरुआत करीब एक साल पहले हुई, जब जयपुर की एयरपोर्ट कॉलोनी में रहने वाली निरज शर्मा के पति का निधन हो गया था। पति की मौत के बाद वकालत पढ़ रही बेटी आयुषी शर्मा अड़ गई कि अनुकंपा के आधार पर यह एलडीसी (LDC) की सरकारी नौकरी उसे मिलनी चाहिए। मां निरज शर्मा बेटी को नौकरी देने के लिए तैयार भी हो गई थीं। लेकिन तभी निरज के भाई (जो खुद लोअर कोर्ट में एलडीसी हैं) ने उन्हें समझाया कि आयुषी तो कल को शादी करके अपने घर चली जाएगी, लेकिन उनका 16 साल का मानसिक रूप से दिव्यांग बेटा है, उसकी जिंदगी का सहारा कौन बनेगा? अपने उस बेबस और मासूम बेटे की खातिर मां ने खुद कोर्ट में एलडीसी की नौकरी जॉइन कर ली। बस यही बात कलयुगी बेटी आयुषी को चुभ गई।
भाई से कहा- '10 करोड़ की जमीन तेरी, मां को मरवा दे बस'
नौकरी न मिलने और करोड़ों की संपत्ति हाथ से जाने के डर से आयुषी के सिर पर खून सवार हो गया। उसने अपने चचेरे भाई बलराम उर्फ रवि से हाथ मिलाया और लालच देते हुए कहा, "भाई, 10 करोड़ की जमीन तेरी, मां को मरवा दे बस, मुझे तो बस सरकारी नौकरी चाहिए।" इसके बाद आयुषी ने अपने ताऊ मोहन स्वरूप और चचेरे भाई बलराम के साथ मिलकर भरतपुर के एक पेशेवर अपराधी हेमंत शर्मा को मां को रास्ते से हटाने के लिए 7 लाख रुपये की भारी-भरकम सुपारी दे दी।
पहली कोशिश नाकाम हुई तो घर के बाहर किया टोना-टोटका
साजिशकर्ताओं ने पहले एक 'थार' गाड़ी किराए पर ली और कई दिनों तक मां निरज शर्मा की रेकी की, लेकिन वे वारदात को अंजाम नहीं दे पाए। पहली कोशिश नाकाम होने के बाद आयुषी को मां को मारने की इतनी जल्दी थी कि उसने अंधविश्वास का सहारा लिया। वह अपनी सगी मां को घर से बाहर निकालने और मौत के जाल में फंसाने के लिए घर के बाहर नींबू-मिर्च और टोना-टोटका (काला जादू) करने लगी ताकि किसी भी बहाने से मां घर से बाहर निकले और शिकारी अपना काम कर सकें।
स्कॉर्पियो का शिकार बनी निरज शर्मा
आखिरकार 3 जुलाई 2026 की शाम करीब 4 बजकर 45 मिनट पर वह मनहूस वक्त आ ही गया। मां निरज शर्मा अपने उसी दिव्यांग बेटे को कोचिंग इंस्टिट्यूट छोड़कर स्कूटी से वापस घर लौट रही थीं। तभी घात लगाए बैठे सुपारी किलर्स ने तेज रफ्तार से दौड़ रही एक सफेद स्कॉर्पियो से निरज शर्मा को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भयावह थी कि निरज शर्मा का शरीर हवा में उछलकर काफी दूर जा गिरा और मौके पर ही तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गई। आरोपियों ने इस पूरी हत्या को एक सामान्य रोड एक्सीडेंट का रूप देने की पूरी कोशिश की थी।
हत्या के बाद मामा को फोन कर रोने का नाटक, पुलिस के सामने अकड़
मां की मौत पक्की करने के बाद शातिर बेटी आयुषी ने तुरंत अपने मामा को फोन लगाया और रोने का नाटक करते हुए बोली, "मामा, मां मर गई है।" लेकिन कानून की छात्रा आयुषी यह भूल गई कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं। पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाली तो एक्सीडेंट संदिग्ध लगा। जांच आगे बढ़ी तो कड़ियां जुड़ती गईं। जब जयपुर पुलिस आरोपी बेटी को पकड़ने भरतपुर के रूपावास गांव पहुंची, तो वकालत की धौंस दिखाते हुए आयुषी ने पुलिसकर्मियों को ही धमकाना शुरू कर दिया।
लेकिन जब पुलिस उसे जयपुर लेकर आई और सबूत सामने रखे, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। रूह कंपा देने वाली बात यह है कि पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद भी इस कलयुगी बेटी के चेहरे पर अपनी मां की हत्या का कोई पछतावा या शिकन नहीं है, वह आज भी पुलिस को उल्टे-सीधे जवाब दे रही है। इस मामले में पुलिस अब तक आयुषी, उसके ताऊ मोहन स्वरूप, और शूटरों सहित 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि मुख्य साजिशकर्ता चचेरा भाई बलराम अब भी फरार है।