अपराधियों के लिए बोनस बना आपका आधार! फर्जी सिम से अपराध का चल रहा बड़ा रैकेट

Rahul Jadaun 09 Jul 2026 08:23: PM 2 Mins
अपराधियों के लिए बोनस बना आपका आधार! फर्जी सिम से अपराध का चल रहा बड़ा रैकेट

साइबर अपराध: देश में बढ़ती साइबर धोखाधड़ी और ऑनलाइन लूट के बीच एक ऐसा चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता के कान खड़े कर दिए हैं। आम नागरिकों की पहचान की सुरक्षा के लिए बना 'आधार' कार्ड अब शातिर साइबर ठगों के लिए एक हथियार (बोनस) बन चुका है। छत्तीसगढ़ पुलिस की विशेष टीम द्वारा चलाए गए 'ऑपरेशन साइबर शील्ड' के तहत एक ऐसे बड़े अंतरराज्यीय रैकेट का पर्दाफाश किया गया है, जो आम लोगों के दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर हजारों की संख्या में फर्जी सिम एक्टिवेट कर रहा था। इन फर्जी सिमों का इस्तेमाल कर देश भर में करोड़ो रुपये के साइबर अपराधों को अंजाम दिया जा रहा है।

'ऑपरेशन साइबर शील्ड' का बड़ा एक्शन: 18 हजार से ज्यादा सिम ब्लॉक साइबर सेल और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस रैकेट के तार कई राज्यों से जुड़े हुए हैं। 'ऑपरेशन साइबर शील्ड' के तहत पुलिस ने अब तक 18,500 से अधिक संदिग्ध सिम कार्ड्स को चिन्हित कर उन्हें पूरी तरह से ब्लॉक करवाया है। जांच में सामने आया है कि ये सभी सिम कार्ड्स फर्जी पते, जाली दस्तावेजों या फिर किसी अनजान व्यक्ति के बायोमेट्रिक और पहचान पत्र (आईडी) का दुरुपयोग करके चालू किए गए थे। इस मामले में पुलिस ने अलग-अलग टेलीकॉम आउटलेट्स और रिटेलर्स के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार भी किया है।

कैसे काम करता है यह पूरा रैकेट?

पुलिस पूछताछ और फॉरेंसिक जांच में इस रैकेट के काम करने का जो तरीका (Modus Operandi) सामने आया है, वह बेहद डराने वाला है:

  1. बायोमेट्रिक क्लोनिंग और फोटो का खेल: जब कोई आम नागरिक किसी स्थानीय दुकान या कियोस्क पर नया सिम लेने या केवाईसी (KYC) कराने जाता है, तो ये जालसाज रिटेलर फिंगरप्रिंट लेते वक्त 'लिंक फेल' या 'सर्वर डाउन' होने का बहाना बनाते हैं और ग्राहक का बायोमेट्रिक डेटा (अंगूठे का निशान) दोबारा ले लेते हैं।

  2. एक आईडी पर कई सिम: ग्राहक को तो सिर्फ एक सिम मिलता है, लेकिन उसके उसी थम्ब इम्प्रैशन और आईडी का इस्तेमाल कर बैकएंड से 3 से 4 अन्य सिम कार्ड एक्टिवेट कर लिए जाते हैं।

  3. डार्क वेव और जामताड़ा कनेक्शन: इन एक्टिवेटेड फर्जी सिमों को बाद में ऊंचे दामों पर साइबर अपराधियों, जामताड़ा और नूंह जैसे ठगी के गढ़ों में सक्रिय गैंग्स को बेच दिया जाता है, जिससे वे पुलिस की ट्रैकिंग से बचे रहते हैं।

जांच एजेंसियों ने जारी की गाइडलाइन: खुद को ऐसे बचाएं

इस गंभीर रैकेट के सामने आने के बाद दूरसंचार विभाग (DoT) और पुलिस की साइबर विंग ने देश के नागरिकों के लिए सख्त चेतावनी जारी की है। अधिकारियों का कहना है कि लोग समय-समय पर सरकार के आधिकारिक पोर्टल (TAFCOP) पर जाकर यह जरूर चेक करें कि उनके नाम पर वर्तमान में कितने सिम कार्ड चल रहे हैं। अगर कोई ऐसा नंबर दिखता है जो उन्होंने नहीं लिया है, तो उसे तुरंत ब्लॉक करने की रिपोर्ट डालें। इस कार्रवाई के बाद केंद्र सरकार भी सिम कार्ड वेंडर्स और रिटेलर्स के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के नियमों को और कड़ा करने पर विचार कर रही है।

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