नेशनल न्यूज: देश में स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम और इतिहास के अध्यायों को लेकर एक बार फिर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक घमासान शुरू हो गया है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 8 की इतिहास की पाठ्यपुस्तक में एक बड़ा और ऐतिहासिक संशोधन (Revision) किया है। इस नए बदलाव के तहत जहां जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर (Hitler) से जुड़े कुछ प्रमुख हिस्सों को पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है, वहीं वीर सावरकर (Savarkar) और 'विभाजन की विभीषिका' (Partition of India) जैसे गंभीर अध्यायों को नए पाठ्यक्रम में प्रमुखता से जगह दी गई है। इस बदलाव के सामने आते ही कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार पर इतिहास को बदलने का आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है।
हिटलर का चैप्टर क्यों हुआ कम? सावरकर की हुई एंट्री एनसीईआरटी द्वारा जारी नए पाठ्यक्रम के आंकड़ों के मुताबिक, कक्षा 8 की इतिहास की किताब 'हमारे अतीत-III' में यह बड़ा फेरबदल किया गया है। अब तक छात्रों को नाजीवाद और हिटलर के उदय के बारे में विस्तार से पढ़ाया जाता था, लेकिन समीक्षा समिति (Review Committee) की सिफारिशों के बाद इस हिस्से को काफी सीमित या हटा दिया गया है।
इसकी जगह आधुनिक भारत के इतिहास में विनायक दामोदर सावरकर (वीर सावरकर) के योगदान, उनके स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलनों और अंडमान जेल के दिनों के संघर्ष को नए अध्याय के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा, भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय हुई हिंसा और विस्थापन के दर्द को 'विभाजन की विभीषिका स्मृति दिवस' के संदर्भ के साथ बच्चों को पढ़ाया जाएगा।
विभाजन और कांग्रेस की भूमिका पर नया नैरेटिव नए सिलेबस में सिर्फ सावरकर को शामिल ही नहीं किया गया है, बल्कि भारत की आजादी और विभाजन के समय तत्कालीन राजनीतिक दलों, विशेषकर कांग्रेस की नीतियों और निर्णयों को लेकर भी अध्यायों में नए फैक्ट्स जोड़े गए हैं। नए पाठों में यह दर्शाया गया है कि विभाजन के समय किन परिस्थितियों के कारण देश को टूटना पड़ा और उस दौरान आम जनता ने क्या-क्या यातनाएं झेलीं। इतिहास की किताबों में कांग्रेस के इस दौर की भूमिका की समीक्षात्मक प्रस्तुति ने विपक्षी खेमे को नाराज कर दिया है।
कांग्रेस का तीखा पलटवार- 'यह इतिहास का भगवाकरण है' एनसीईआरटी के इस कदम पर कांग्रेस और वामपंथी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार शिक्षा के वैश्विक मानकों को दरकिनार कर अपनी विचारधारा के अनुरूप इतिहास को विकृत (Distort) कर रही है। कांग्रेस ने कहा, "आजादी की लड़ाई से हिटलर को हटाने और सावरकर को महिमामंडित करने का यह प्रयास आने वाली पीढ़ी को भ्रमित करेगा।" दूसरी तरफ, एनसीईआरटी के अधिकारियों और शिक्षाविदों का तर्क है कि यह बदलाव छात्रों पर से पाठ्यक्रम का बोझ कम करने और उन्हें भारत के वास्तविक व क्षेत्रीय इतिहास से अधिक परिचित कराने के उद्देश्य से किया गया है।