चोल काल की धरोहर लौटी! ऑस्ट्रेलिया से भारत वापस आए 6 सिर वाले कार्तिकेय, नंदी और भद्रकाली त्रिशूल

Amanat Ansari 09 Jul 2026 08:40: PM 1 Mins
चोल काल की धरोहर लौटी! ऑस्ट्रेलिया से भारत वापस आए 6 सिर वाले कार्तिकेय, नंदी और भद्रकाली त्रिशूल

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान भारत को अपनी सांस्कृतिक धरोहर की तीन अनमोल निधियां वापस मिली हैं. तमिलनाडु के प्राचीन मंदिरों से चुराए गए 6 सिर वाले कार्तिकेय (मुरुगन) की मूर्ति, नंदी की प्रतिमा और भद्रकाली त्रिशूल अब भारत लौट रहे हैं. ये तीनों दुर्लभ कलाकृतियां फिलहाल ऑस्ट्रेलिया की नेशनल गैलरी में रखी थीं. तमिलनाडु आइडल विंग CID की जांच के बाद म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT) के तहत इन्हें भारत को सौंपा जा रहा है.

इन कलाकृतियों की खासियत

  • षण्मुख कार्तिकेय (6 सिर वाला मुरुगन): 12वीं शताब्दी की चोला काल की मूर्ति. कुम्भकोणम के पास मणंबाडी के नागनाथस्वामी मंदिर से चुराई गई थी. ऊंचाई लगभग 130 सेमी.
  • नंदी प्रतिमा: 13वीं-16वीं शताब्दी की, तिरुवारुर जिले के कडुवनकुडी स्थित कैलासनाथर मंदिर से संबंधित. एक ही पत्थर से तराशी गई, कीमत लगभग 4 करोड़ रुपये आंकी गई है.
  • भद्रकाली त्रिशूल: चोला काल का दुर्लभ धातु त्रिशूल, श्री कासी विश्वनाथस्वामी मंदिर से. त्योहारों और जुलूसों में इस्तेमाल होने वाला यह प्रतीक शक्ति, न्याय और सुरक्षा का द्योतक है.

कैसे हुई वापसी?

2016 में तमिलनाडु आइडल विंग CID ने FIR दर्ज की थी. मंदिर के पुराने रिकॉर्ड, फोटो, पुरालेख और म्यूजियम कैटलॉग के आधार पर प्रमाण जुटाए गए. लंबी कानूनी और कूटनीतिक प्रक्रिया के बाद ऑस्ट्रेलिया ने इन्हें वापस करने पर सहमति जताई.

यह घटना भारत द्वारा विदेशों से लौटाई जा रही प्राचीन कलाकृतियों की श्रृंखला में एक और सफल कड़ी है. पिछले 10 वर्षों में अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन समेत कई देशों से भारतीय मूर्तियां और कलाकृतियां वापस आई हैं. ये मूर्तियां अब भारतीय संग्रहालयों में रखी जाएंगी और अपनी जड़ों से जुड़कर फिर से अपनी कहानी बयां करेंगी. चोला साम्राज्य की कला, शिल्पकला और आस्था की ये अमूल्य निशानियां अब घर वापस आ रही हैं.

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