नई दिल्ली: भारत की शक्तिशाली ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल अब वैश्विक रक्षा बाजार में धूम मचा रही है. फिलीपींस और वियतनाम के बाद अब इंडोनेशिया भी इसका आधिकारिक खरीदार बन गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इस ऐतिहासिक डील की घोषणा की गई. बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ब्रह्मोस मिसाइल की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऑपरेशन सिंदूर में अपनी अचूक सटीकता और घातक ताकत दिखाने के बाद इस मिसाइल ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है.
कौन-कौन खरीदार
रुचि दिखाने वाले देश
दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, चिली, ब्राजील और संयुक्त अरब अमीरात (UAE). UAE ब्रह्मोस के साथ आकाशतीर सिस्टम खरीदने पर भी विचार कर रहा है. भारत-रूस का संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस मिसाइल फायर एंड फॉरगेट सिद्धांत पर काम करती है. Mach 2.8 की सुपरसोनिक गति, कम ऊंचाई पर उड़ान और दुश्मन के लिए इंटरसेप्ट करना लगभग नामुमकिन होने के कारण इसे दुनिया की सबसे खतरनाक क्रूज मिसाइलों में शुमार किया जाता है.
भारत के लिए बड़ी उपलब्धि
इसे जमीन, समुद्र, पनडुब्बी और हवा से लॉन्च किया जा सकता है. यह डील न केवल भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को मजबूत करती है, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को भी दर्शाती है. ब्रह्मोस एयरोस्पेस के प्रमुख जयतीर्थ जोशी के अनुसार, कई अन्य देशों के साथ भी बातचीत चल रही है.
रूस भी बढ़ाएगा उत्पादन
रूस भी ब्रह्मोस के उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर भारत के साथ चर्चा कर रहा है. भारत अब रक्षा क्षेत्र में न सिर्फ आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि विश्व स्तर पर मजबूत निर्यातक के रूप में उभर रहा है. ब्रह्मोस अब ‘मेड इन इंडिया’ की सबसे बड़ी मिसाइल कूटनीति का प्रतीक बन गया है.