नई दिल्ली: भारतीय वायुसेना की गौरवशाली कहानी में एक और प्रेरणादायक अध्याय जुड़ गया. मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे देवलोंड से निकली अवनी चतुर्वेदी ने अपनी मेहनत और हौसले से इतिहास रच दिया. वे भारत की पहली महिला फाइटर पायलट बनीं, जिन्होंने बिना किसी ट्रेनर के MiG-21 बाइसन जेट को अकेले उड़ाया.
अवनी का जन्म रीवा जिले में हुआ. उनके बड़े भाई भारतीय सेना में थे. भाई की वर्दी देखकर उनमें भी देशसेवा की लगन जागी. उन्होंने आसमान को चुना और फाइटर पायलट बनने का सपना देखा. उस समय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम महिलाओं के लिए बंद थी, लेकिन अवनी ने हार नहीं मानी.
बनस्थली विद्यापीठ से बीटेक करने के दौरान वे फ्लाइंग क्लब से जुड़ीं. यहां से उड़ान का जुनून उनमें घर कर गया. उन्होंने AFCAT परीक्षा पास की और 2015 में जब सरकार ने महिलाओं के लिए फाइटर स्ट्रीम खोलने का फैसला किया, तो अवनी, भावना कंठ और मोहना सिंह को चुना गया.
ऐतिहासिक उड़ान
19 फरवरी 2018 को जामनगर एयरबेस से अवनी चतुर्वेदी ने MiG-21 बाइसन को अकेले (सोलो फ्लाइट) उड़ाया. करीब 30 मिनट की इस उड़ान ने उन्हें भारतीय वायुसेना की पहली महिला फाइटर पायलट बना दिया. 2023 में जापान में अंतरराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास में भाग लिया. 2020 में नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया.
अवनी का कहना है, ''विमान को फर्क नहीं पड़ता कि उसे उड़ाने वाला पुरुष है या महिला. उसे सिर्फ यह पता होता है कि कौन उसे सही तरीके से उड़ा सकता है.'' अवनी की कहानी लाखों लड़कियों के लिए मिसाल बन गई है कि सही हौसले और मेहनत से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. वे न सिर्फ भारतीय वायुसेना की शान हैं, बल्कि नारी शक्ति का जीवंत प्रतीक भी.