नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि एल-नीनो वापस लौट रहा है और यह काफी शक्तिशाली हो सकता है. NASA के Sentinel-6 सैटेलाइट ने प्रशांत महासागर में एक विशाल गर्म पानी की लहर (Kelvin Wave) का पता लगाया है, जो लगभग 14,500 किलोमीटर लंबी है.
क्या है ये मॉन्स्टर वेव?
यह गर्म पानी की लहर इंडोनेशिया के पास से शुरू होकर पूर्व की ओर बढ़ रही है. सामान्य व्यापारिक हवाओं के कमजोर पड़ने से यह लहर बनती है. गर्म पानी फैलने के कारण समुद्र की सतह ऊपर उठ जाती है. NASA सैटेलाइट ने इसे 15 सेंटीमीटर तक ऊपर उठा हुआ पाया.
NOAA (अमेरिकी मौसम एजेंसी) ने 11 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर एल-नीनो की घोषणा कर दी है. पूर्वानुमान के मुताबिक, सर्दियों तक यह 63% संभावना के साथ बहुत मजबूत (Super El Niño) बन सकता है, जैसा 1997 और 2015 में हुआ था.
भारत पर क्या असर?
मजबूत एल-नीनो आमतौर पर भारत के दक्षिण-पश्चिम मानसून को कमजोर करता है, जिससे सूखा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है. हालांकि भारतीय महासागर द्विआधारी (Indian Ocean Dipole) जैसे अन्य कारक इसका असर कम कर सकते हैं.
वैज्ञानिकों के अनुसार यह घटना सर्दियों में चरम पर पहुंचेगी. दुनिया अब इसका असर देखने का इंतजार कर रही है. NASA Sentinel-6 सैटेलाइट ने इस लहर को 10 दिनों के अंतराल पर सटीक रूप से ट्रैक किया, जो मौसम पूर्वानुमान और जलवायु अध्ययन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.