कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद से ही सियासी संकटों से जूझ रही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) को आज तक का सबसे बड़ा और करारा झटका लगा है। टीएमसी के भीतर लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब पार्टी के टूटने के कगार पर पहुंच गई है। गुरुवार (9 जुलाई 2026) को टीएमसी के तीन बेहद कद्दावर नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुस्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाइक ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। एक साथ तीन बड़े चेहरों के पाला बदलने के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि ममता बनर्जी की पार्टी अब राजनीतिक रूप से भारी नुकसान के रास्ते पर बढ़ रही है।
दिल्ली में बीजेपी मुख्यालय में हुआ मेगा जॉइनिंग कार्यक्रम
गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय मुख्यालय में एक भव्य जॉइनिंग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिवों और पश्चिम बंगाल बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में तीनों पूर्व सांसदों को पार्टी की सदस्यता दिलाई गई और अंगवस्त्र पहनाकर स्वागत किया गया। बीजेपी में शामिल होते ही तीनों नेताओं ने ममता बनर्जी के नेतृत्व और पश्चिम बंगाल की मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर तीखे सवाल खड़े किए।
इन तीन बड़े दिग्गजों ने छोड़ी ममता की 'नाव'
पार्टी छोड़ने वाले ये तीनों चेहरे टीएमसी के बेहद मजबूत स्तंभ माने जाते थे:
सुखेंदु शेखर रॉय: टीएमसी के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक और राज्यसभा में लंबे समय तक पार्टी की मुखर आवाज रहे सुखेंदु शेखर रॉय का जाना ममता बनर्जी के लिए सबसे बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका है।
सुस्मिता देव: असम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में टीएमसी का जनाधार मजबूत करने की जिम्मेदारी संभालने वाली पूर्व महिला कांग्रेस अध्यक्ष और टीएमसी राज्यसभा सांसद सुस्मिता देव के बीजेपी में आने से पूर्वोत्तर में भी समीकरण बदलेंगे।
प्रकाश चिक बड़ाइक: उत्तर बंगाल के चाय बागान क्षेत्रों में टीएमसी का बड़ा आदिवासी चेहरा रहे प्रकाश चिक बड़ाइक के पाला बदलने से टीएमसी का एक बड़ा वोट बैंक खिसकना तय माना जा रहा है।
क्यों बिखर रही है टीएमसी?
बीजेपी की सदस्यता लेने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सुखेंदु शेखर रॉय और सुस्मिता देव ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर अब लोकतंत्र खत्म हो चुका है और पार्टी में वरिष्ठ नेताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। बंगाल में बढ़ते भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था के संकट और हालिया राजनीतिक हिंसा की घटनाओं से क्षुब्ध होकर उन्होंने यह फैसला लिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन तीन कद्दावर नेताओं के इस्तीफे के बाद टीएमसी के कई अन्य विधायक और सांसद भी बीजेपी के संपर्क में हैं, जिससे ममता बनर्जी की सरकार पर संकट के बादल गहरा सकते हैं।