मणिपुर: नागा-कुकी संघर्ष का निशाना बनी असम रायफल्स, दो शहीद जवानों का राजकीय सम्मान से हुई अंतिम विदाई; 5 महीनों में 25 लोगों की हुई मौत

Rahul Jadaun 09 Jul 2026 05:44: PM 2 Mins
मणिपुर: नागा-कुकी संघर्ष का निशाना बनी असम रायफल्स, दो शहीद जवानों का राजकीय सम्मान से हुई अंतिम विदाई; 5 महीनों में 25 लोगों की हुई मौत

मणिपुर: पूर्वोत्तर का राज्य मणिपुर पिछले काफी समय से हिंसा की आग में झुलस रहा है, जहां अब नागा और कुकी समुदायों के बीच जारी खूनी संघर्ष का शिकार देश के सुरक्षा बल भी होने लगे हैं। मणिपुर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांति बहाली की कोशिशों में जुटे असम रायफल्स (Assam Rifles) के जवानों पर हुए हालिया हमले में दो वीर जवान शहीद हो गए। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले इन दोनों जांबाज शहीदों का पूरे राजकीय और सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई की गई। इस दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा और लोगों की आंखें नम हो गईं। पिछले 5 महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें, तो इस हिंसा में अब तक 25 आम नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों की जान जा चुकी है।

हमले की शिकार बनी असम रायफल्स

सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, असम रायफल्स के जवान प्रभावित इलाकों में गश्त (Petrolling) और शांति स्थापित करने के अभियान पर थे। इसी दौरान नागा और कुकी उग्रवादियों की हिंसक झड़प और गोलीबारी की चपेट में सुरक्षा बल आ गए। उपद्रवियों ने घात लगाकर सुरक्षा बलों को निशाना बनाया, जिसमें असम रायफल्स के दो जवानों को वीरगति प्राप्त हुई। घटना के तुरंत बाद सेना और अतिरिक्त सुरक्षा बलों ने इलाके की घेराबंदी कर हमलावरों की धरपकड़ के लिए बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है।

शहीदों को अंतिम विदाई और राजकीय सम्मान

शहीद जवानों के पार्थिव शरीर जब उनके गृह निवास और सैन्य मुख्यालय पहुंचे, तो पूरा इलाका 'भारत माता की जय' और 'शहीद जवान अमर रहें' के नारों से गूंज उठा। राज्य सरकार और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों वीर सपूतों को तिरंगे में लपेटकर अंतिम विदाई दी गई। जवानों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उपस्थित जनसैलाब ने नम आंखों से देश के इन रखवालों को नमन किया।

5 महीनों में 25 मौतें; थम नहीं रही हिंसा

मणिपुर की जमीनी स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले महज 5 महीनों के भीतर ही नागा-कुकी और अन्य जनजातीय टकरावों के चलते कम से कम 25 लोगों की मौत हो चुकी है। इस हिंसा के कारण हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। सरकार और स्थानीय प्रशासन शांति वार्ता के जरिए स्थिति को नियंत्रण में लाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीन पर रह-रहकर भड़क रही हिंसा और सुरक्षा बलों को निशाना बनाए जाने की घटनाओं ने केंद्र और राज्य सरकार की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।

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