लखनऊ: उत्तर प्रदेश में विकास के प्रतीक माने जा रहे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का एक हिस्सा उद्घाटन से ठीक पहले क्षतिग्रस्त हो गया है. इस घटना पर उठे सवालों का जवाब देते हुए राज्य मंत्री दिनेश प्रताप सिंह का बयान अब बड़े राजनीतिक विवाद में बदल गया है. मंत्री ने आलोचना का जवाब देते हुए कहा, ''सड़क खुद बना लो. सड़क बनती है तो टूटती भी है, यह लगातार चलने वाली प्रक्रिया है. इसमें नई बात कुछ नहीं है.''
विपक्ष का हमला
इस बयान पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने तीखा हमला बोला है. कांग्रेस प्रवक्ता उमाशंकर पांडे ने इसे भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी की चरम सीमा बताया. उन्होंने कहा, ''उद्घाटन से चार दिन पहले ही सड़क ढह जाना नया रिकॉर्ड है. पहले सड़कें उद्घाटन के 3-4 दिन बाद टूटती थीं, अब उद्घाटन से पहले ही.''
कांग्रेस ने 40-50% कमीशन की आशंका जताते हुए मंत्रियों की संपत्ति जांच की मांग भी की है. समाजवादी पार्टी के नेता दीपक रंजन ने भी मंत्री के बयान की आलोचना की और कहा कि जनता की मेहनत की कमाई से बने इंफ्रास्ट्रक्चर की यह हालत बेहद शर्मनाक है.
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन जल्द होने वाला था, लेकिन उद्घाटन से कुछ दिन पहले ही सड़क के एक हिस्से में क्षति की खबर सामने आई. विपक्ष इसे निम्न गुणवत्ता वाले निर्माण और भ्रष्टाचार का सबूत बता रहा है, जबकि सत्ताधारी पक्ष इसे निर्माण प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा बता रहा है. यह विवाद उत्तर प्रदेश में सड़क एवं इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की गुणवत्ता को लेकर नए सिरे से बहस छेड़ गया है.