इंटरनेशनल : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य टकराव अब पूरी तरह नियंत्रण से बाहर हो चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा नाटो (NATO) समिट से लौटने के बाद जारी की गई चेतावनियों के बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक और परिवहन बुनियादी ढांचे पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है। ताजा हवाई हमलों में अमेरिका ने ईरान के पवित्र शहर मशहद को जोड़ने वाली मुख्य रेलवे लाइन और तटीय शहर बंदर अब्बास को निशाना बनाया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो दिनों में देश के पांच प्रांतों पर हुए इन हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है और 78 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
खामेनेई के जनाजे समय मशहद का रेल लिंक काटा
यह हमला रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद संवेदनशील समय पर किया गया है। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद, उन्हें उनके सबसे पवित्र शहर मशहद में इमाम रज़ा की दरगाह के पास दफनाया जाना था। लेकिन इस दफन प्रक्रिया (Burial) से कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी क्रूज मिसाइलों ने उत्तर-पूर्वी प्रांत गोलिस्तान में स्थित 'अक तेके खान' (Aq Tekeh Khan) रेलवे पुल सहित दो प्रमुख रेल ब्रिजों को उड़ा दिया। इसके चलते तेहरान और मशहद के बीच चलने वाली पैसेंजर ट्रेन सेवा को पूरी तरह ठप करना पड़ा है।
खोरासान रेलवे के जनसंपर्क प्रमुख (Public Relations Head) जावद मेराज-फार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि अमेरिकी हमले के कारण तेहरान-मशहद रूट पूरी तरह बाधित हुआ है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान रेलवे ने इस तबाही के लिए "अमेरिका-इजरायल के आपराधिक हमले" को जिम्मेदार ठहराया है। रेलवे इंजीनियर मौके पर मरम्मत कार्य में जुटे हैं और फंसे हुए यात्रियों को सड़क मार्ग से भेजा जा रहा है।
बंदर अब्बास और बुशहर न्यूक्लियर प्लांट के पास भारी विस्फोट
रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर के अलावा, अमेरिकी सेंट्रल कमान (CENTCOM) ने ईरान के तटीय और नौसैनिक ठिकानों को भी निशाना बनाया है। ईरान के प्रमुख बंदरगाह शहर बंदर अब्बास, सिरिक, चाबहार और लावन द्वीप पर भीषण बमबारी की गई है, जिसके वीडियो राष्ट्रपति ट्रंप ने खुद सोशल मीडिया पर साझा किए हैं। इसके अलावा ईरान के बुशहर प्रांत, जहां देश का एकमात्र न्यूक्लियर पावर प्लांट स्थित है, उसके आस-पास के इलाकों में भी गुरुवार सुबह भारी धमाकों की आवाजें सुनी गईं।
CENTCOM ने बयान जारी कर कहा है कि उन्होंने वायु रक्षा प्रणालियों, तटीय निगरानी संपत्तियों और मिसाइल-ड्रोन स्टोरेज साइटों सहित ईरान के करीब 90 सैन्य ठिकानों को तबाह कर दिया है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों पर होने वाले हमलों को रोका जा सके।
ईरान का जवाबी पलटवार
इस बड़े नुकसान के बाद ईरान ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है और ब्रिटेन के राजदूत ह्यूगो शॉर्टर (Hugo Shorter) को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। वहीं जमीनी स्तर पर ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी मिलिट्री बेसों पर मिसाइलें दागी हैं, जिसके बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तीसरे विश्व युद्ध (World War 3) जैसी स्थिति बन गई है।