डोभाल के साथ मिलकर जयशंकर ने कर दिया है चीन का इंतजाम,अब बॉर्डर पर भूलकर भी नहीं करेगा बवाल

Global Bharat 14 Dec 2022 3 Mins
डोभाल के साथ मिलकर जयशंकर ने कर दिया है चीन का इंतजाम,अब बॉर्डर पर भूलकर भी नहीं करेगा बवाल

विदेश मंत्री एस जयशंकर जिनके दिमाग का लोहा अमेरिका, रूस और पाकिस्तान तक मानते हैं, उन्होंने इस बार डोभाल के साथ मिलकर चीन का ऐसा इंतजाम किया है, वो गलती से भी भारतीय सीमा में घुसने की गलती नहीं करेगा, जैसे ही तवांग से झड़प की ख़बर आई, दिल्ली में सारे अधिकारी अलर्ट हो गए, ख़बर है कि पीएम मोदी ने तुरंत राजनाथ सिंह और एस जयशंकर से अपडेट लिया, अमित शाह ने ये कहा कि बॉर्डर पर कोई भी कमी नहीं होनी चाहिए, और भारत ने ऑपरेशन चाइना बॉर्डर की भी तैयारी कर ली है.

लद्दाख से लेकर डोकलाम तक और अरुणाचल से लेकर सिक्किम तक इस बार चीन पर पैनी नजर रखी जा रही है, बॉर्डर पर तैनात जवानों को साफ कहा गया है कि आपको किसी भी कीमत पर पीछे नहीं हटना है, ऑर्डर का इंतजार नहीं करना है बल्कि हालात के मुताबिक खुद फैसला लेना है.
सेना से जुड़ी तैयारियों के बारे में पब्लिक में बात नहीं होती, लेकिन ख़बर है बीते दो साल में भारत ने बॉर्डर इलाकों में इतनी तैयारी कर ली है, जितनी बीते 20 सालों में नहीं हुई. साल 1962 में जब चीन सीमा पर अपनी तैनाती बढ़ा रहा था तो नेहरू निश्चिंत थे, उन्हें लग रहा था हमला नहीं करेगा, लेकिन इस बार मोदी निश्चिंत नहीं हैं, बल्कि पल-पल की रिपोर्ट ले रहे हैं, जयशंकर दूसरे देशों की मदद से चीन पर दबाव बनाने का काम कर रहे हैं और ये साफ भी कर चुके हैं कि हम इस बार उसकी गलतियां बर्दाश्त नहीं करेंगे.

तभी तो चीन ने सीमा पर गांव बसाए और हथियारों का जखीरा भेजा तो भारत भी बड़े-बड़े लड़ाकू विमान और भारी संख्या में गोला-बारूद बॉर्डर तक पहुंचा दिया. अब पहले की तरह जवानों को रसद पहुंचाने की भी दिक्कत नहीं होने वाली, क्योंकि सड़क कनेक्टिविटी जम्मू से लेकर लद्दाख और अरुणाचल तक में अच्छी हुई है, कभी एक वक्त था जब अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी इलाके में सेना के पास लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर काफी कम संख्या में थे.
लेकिन अब सेना की हर मांग लगभग पूरी की जा रही है, तीनों सेनाओं के आपात बजट में बंपर इजाफा हुआ है, उन्हें बस अपनी रिपोर्ट देनी होती है कि बॉर्डर पर इन चीजों की कमी है, इसका ताजा उदाहरण तब देखने को मिला जब अरुणाचल प्रदेश के इलाके में लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर यानि एलसीएच की तैनाती हुई, एयरफोर्स के कुछ अधिकारियों ने कहा कि हम इसे धीरे-धीरे रिप्लेस करेंगे, हमें अभी 50 प्रतिशत ही नए हेलीकॉप्टर चाहिए, लेकिन मोदी सरकार और उसके वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि आप कोई भी रिस्क मत लीजिए, मिग21 को हटाने के लिए भी तैयार रहिए, हमें अपनी सेना को मजबूत करना है, हम अपनी सेना को जंग में कमजोर हथियारों के साथ नहीं जाने देना चाहते ये बात मोदी भी पहले ही कह चुकै हैं. मतलब भारत इस बार पूरी तरह से तैयार है, फिर सवाल ये उठता है कि चीन भारत को कमजोर समझने की भूल क्यों कर रहा है, डिफेंस एक्सपर्ट कहते हैं

चीन को लगता है कि वो अपनी पुरानी पॉलिसी के दम पर दबाव बनाकर, घुसपैठ कर और बार-बार सैनिकों से झड़प कर अपने मंसूबे में कामयाब हो जाएगा, लेकिन अब भारत पहले की तरह नहीं सोचता. यहां हर किसी को अपना रोल अच्छी तरह पता है, सेना के जवान पेट्रोलिंग करते हैं, अधिकारी रिपोर्ट तैयार करते हैं, फिर वो दिल्ली पहुंचता है तो तुरंत एक्शन होता है.
पीएम मोदी 2014 से इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, शाह हमेशा कहते हैं कि सेना की टुकड़ी और हथियार बढ़ाने में संकोच मत करना. जबकि राजनाथ सिंह समय-समय पर बॉर्डर पर जाकर जवानों का हौसला बढ़ाते रहते हैं, मोदी जवानों के साथ दीवाली सिर्फ इसलिए नहीं मनाते कि उन्हें बॉर्डर पर जाना अच्छा लगता है, बल्कि इसलिए मनाते हैं ताकि चीन और पाकिस्तान को ये पता चल सके कि अब हमें हिंदुस्तान को छेड़ा तो वो छोड़ेगा नहीं, उसकी सैन्य शक्ति के साथ-साथ ऱाजनीतिक इच्छाशक्ति भी अब पहले की तुलना में काफी बड़ी है. तभी तो साल बीते दो सालों में चीन ने करीब तीन बार घुसपैठ की कोशिश की, और तीनों बार भारतीय सेना के जवानों ने उन्हें हड्डियां तोड़कर वापस भेज दिया. इस देश के पास जब तक मोदी-जयशंकर और डोभाल की तिकड़ी है, तब तक चीन भी जानता है भारत से पंगा लेना ठीक नहीं होगा, क्योंकि आर्थिक रूप से भी उसकी कमर टूटने लगी है, इसलिए बौखलाहट में ऐसे कदम उठा रहा है, जिसका जवाब सेना के साथ-साथ सरकार भी ढंग से दे रही है.

https://youtu.be/ysWXSleuCrw

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