जमीन से 2 हजार फीट नीचे राजस्थान में जो हुआ, उस पर पूरी मोदी का मंत्रालय बड़ा एक्शन लेने वाली है!

Global Bharat 15 May 2024 3 Mins 63 Views
जमीन से 2 हजार फीट नीचे राजस्थान में जो हुआ, उस पर पूरी मोदी का मंत्रालय बड़ा एक्शन लेने वाली है!

राजस्थान के झुंझनू में एक खदान है, जहां से हिंदुस्तान का 50 फीसदी तांबा निकलता है. यहां के मजदूर हों या ऑफिसर ये हमेशा धरती से सैकड़ों किलोमीटर नीचे रहते हैं, जमीन पर तभी आते हैं जब घर जाना हो, परिवार से मिलना हो या दिल्ली-मुंबई-जापान जाना हो, पूरा एरिया 325 किलोमीटर में फैला है.

इसलिए ये तो सवाल ही नहीं उठता कि जेब में तांबे की तार रखकर भाग जाएंगे, लेकिन ऐसी ही एक तार इन मजदूरों औऱ ऑफिसर के लिए काल बन जाएगी, ये किसी को नहीं पता था. 14 मई को रोजाना की तरह ही काम चल रहा था.  गेट पर डॉक्टर की एक टीम मजदूरों का मेडिकल जांच कर रही थी. 
रोजाना जांच के बाद ही मजदूरों को सैकड़ों फीट नीचे बने खदान में जाने दिया जाता था, क्योंकि जमीन के काफी ऊपर या नीचे जाने पर ऑक्सीजन से लेकर तमाम तरह की दिक्कतें होती हैं. इसी दौरान विजिलेंस के कुछ अधिकारी पहुंचते हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक 14 मई की शाम 5 बजकर 15 मिनट पर खेतड़ी कॉपर कॉर्पोरेशन (KCC) चीफ समेत विजिलेंस की टीम जांच की बात करके अंदर घुसती है और वहां जो देखते हैं, उसकी रिपोर्ट लिखने लगती है. पर रिपोर्ट लेकर बाहर निकल पाती,  उससे पहले ही रात करीब 08:10 बजे माइंस से निकलते समय बड़ा हादसा हो गया. तुरंत डॉक्टर की टीम को अलर्ट पर रखा जाता है.

टेक्निकल टीम दिमाग लगाना शुरू करती है और करीब दो घंटे बाद रात 10 बजकर 19 मिनट पर लिफ्ट का गेट खोला जाता है. इतनी देर तक लिफ्ट के अंदर फंसे अधिकारियों का क्या हाल हुआ होगा, आप ये खुद सोच सकते हैं. रात करीब 3 बजे जब एसडीआरएफ की टीम पहुंची तो एक-एक कर लोग खदान से निकाले गए.

ये हादसा ऐसा था कि इसने राजस्थान से दिल्ली तक सबको हिलाकर रख दिया, जिस लिफ्ट में ये अधिकारी सवार थे, उस लिफ्ट के तार टूट गए और लिफ्ट जमीन से करीब 1900 फीट नीचे जाकर गिरी. किसी के सिर में चोट आई, तो कोई बचाओ-बचाओ चिल्ला रहा था.

खदान के बाहर एंबुलेंस की लाइन लगी थी, पर सवाल था कि इन्हें लाया कैसे जाए. खदान के अंदर गाड़ियां नहीं चलती, बल्कि खदान खोदकर बाहर निकाले जा रहे तांबे को ट्रॉली में भरकर एक जगह से दूसरी जगह तक ले जाया जाता है. किसी तरह लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन अफसोस की बात ये है कि विजिलेंस के मुख्य अधिकारी उपेन्द्र पांडे को नहीं बचाया जा सका, जिसके बाद कई लोग ये पूछ रहे हैं कि क्या इस देश में जान इतनी सस्ती है, हादसे की वजह लिफ्ट का पुराना होना बताया जा रहा है.

रोजाना एक शिफ्ट में यहां करीब 50-60 मजदूर काम करते हैं. सोचिए अगर ये उनके साथ होता तो मामला कितना बड़ा हो सकता था. अक्सर देश के अलग-अलग हिस्से की सोसायटी की लिफ्ट टूटने की ख़बरें भी सामने आ रही है. ग्रेटर नोएडा से लेकर नोएडा तक में ऐसे मामले कई बार सामने आ चुके हैं, तो सवाल ये उठता है कि क्या मोदी सरकार का श्रम विभाग और तमाम मंत्रालय इसे लेकर कोई बड़ा एक्शन लेने वाली है.

जिस हिसाब से लोगों की सुरक्षा ताक पर रखकर लिफ्ट कंपनियां काम कर रही हैं. लिफ्ट के मेंटनेंस का कोई ख्याल नहीं रखा जा रहा है, वो ये बताता है कि हमारे देश में कुछ लोगों के लिए जान कितनी सस्ती हो गई है.

अगर सरकार ऐसे लिफ्ट कंपनियों और उसका मेंटनेंस न करने वालों पर एक्शन नहीं लेते तो ये किसी के भी साथ हो सकता है, चाहे वो सोसायटी में रहने वाले लोग हों, या मॉल जाकर सामान खरीदने वाले लोग. यहां यह भी सवाल उठता है कि क्या लिफ्ट बनाते वक्त सारे सुरक्षा मानकों का ध्यान नहीं रखा जा रहा.  इसकी भी जांच होनी चाहिए. 

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