BHU Controversy: BHU के प्रशांत मिश्रा नाम के छात्र ने ये दावा किया है कि वो क्लास लेने हिंदी विभाग में जब पहुंचे, तो वहां हिमांशु यादव ने पहले उन्हें रोककर नाम पूछा, फिर जाति पूछी, कोर्स के बारे में भी जानकारी ली, उसके बाद सबके सामने गाली-गलौज करते हुए मारपीट करने लगा. सारा मामला वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिसमें ये स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है. शिकायत मिलते ही वाराणसी पुलिस ने एक्शन लिया और आरोपी हिमांशु यादव को गिरफ्तार कर लिया.
सोशल मीडिया पर इस मामले को कुछ लोग अलग तूल देने लगे, यूजीसी रोल बैक ट्रेंड करने लगा. क्योंकि यूजीसी ऐसा कानून है जिसके तहत यूनिवर्सिटी कॉलेज में पढ़ने वाले ओबीसी और एससी/एसटी छात्र-छात्राओं को भेदभाव से राहत मिलती है. लेकिन समस्या ये है सवर्ण छात्रों को इससे परेशानी हो सकती है, उनके खिलाफ झूठी शिकायत दर्ज हो तो भी उनकी मुश्किलें बढ़ सकती हैं. जिसे लेकर विरोध तेज हो चुका है, वो भी तब जब सुप्रीम कोर्ट ने इस पर फिलहाल रोक लगा रखी है.
बीते दिनों लखनऊ में सवर्णों ने शंख बजाकर प्रदर्शन किया तो डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक हाथ जोड़कर पहुंचे और कहा मैं खुद सवर्ण हूं, किसी भी सवर्ण छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे. जिसके बाद लोगों ने विरोध प्रदर्शन समाप्त किया. सवर्ण समाज के लोग इसे काला कानून बता रहे हैं, जबकि दलित नेता चंद्रशेखर समेत कई दिग्गज इसकी वकालत कर रहे हैं...चंद्रशेखर ने तो ये तक कह दिया है कि इस बिल से भेदभाव नहीं होगा, बल्कि ये सबके हित में है. इसे लागू न होने पर कई दलित नेता प्रदर्शन की चेतावनी दे रहे हैं. वो साफ कह रहे हैं कि यूजीसी को लेकर सवर्णों से भी बड़ा आंदोलन बहुजन समाज करेगा, और जब तक यूजीसी के नए नियम लागू नहीं हो जाते, चुप नहीं बैठेंगे.
जानकार कहते हैं मोदी सरकार ने ये बिल लाकर विपक्ष को भी फंसा दिया है, अगर वो समर्थन करें तो सवर्ण वोट छिटकेगा और विरोध करें तो बड़ा वोटबैंक छिटकेगा. सवर्णों की आबादी कम जरूर है लेकिन बड़े पदों पर ये बैठे हुए हैं, जिसे लेकर खूब विरोध देखने को मिला है, पर सवर्ण बनाम ओबीसी और एससी की लड़ाई से ज्यादा बड़ा सवाल ये है कि जिस भेदभाव को खत्म करने के लिए ये कानून लाया जा रहा है, वो भेदभाव तो बढ़ सकता है. बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में जो घटना हिमांशु यादव ने की, उसे कई तरीके की रंग देने की कोशिश की जा रही है, लेकिन पुलिस का दावा है कि प्रॉक्टोरियल बोर्ड से प्राप्त आवेदन के आधार पर लंका थाने में FIR दर्ज की गई. आरोप मारपीट, गाली-गलौज और धमकी से संबंधित हैं. ये घटना आपसी बातचीत के दौरान बढ़े विवाद के रूप में सामने आई है. पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और सभी पहलुओं पर गौर किया जा रहा है.
अगर ये मसला आपसी विवाद का है, जिसे इतना बड़ा तूल दिया गया है तो फिर इसे भी समझना होगा..क्योंकि यूनिवर्सिटी में जहां से राजनीति की शुरुआत होती है, वहां कई तरीके के मामले सामने आते रहते हैं...आने वाले साल में चूंकि यूपी में चुनाव भी है, तो विधानसभा चुनाव को लेकर वाराणसी यूनिवर्सिटी की अहमियत भी बढ़ जाती है, क्योंकि वहां पढ़ने वाले अलग-अलग पार्टियों से जुड़े छात्रनेता नई-नई कहानियां रच सकते हैं...फिलहाल प्रशांत मिश्रा के किसी पार्टी से जुड़े होने की बात सामने नहीं आई है, लेकिन हिमांशु यादव का सपा कनेक्शन सामने आते ही ये सवाल जरूर उठने लगे हैं कि क्या अखिलेश यादव का पीडीए यही है, जहां पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक वोटबैंक औऱ ब्राह्मण या सवर्ण प्रताड़ित होगा...