ये राघव चड्ढा का वो ट्वीट है, जो लिखते हैं खामोश कराया गया हूं, पर हारा नहीं हू...तो सवाल है इन्हें आप ने सदन में खामोश करने की कोशिश क्यों की, राघव चड्ढा तो जनहित के मुद्दे उठा रहे थे, आम आदमी की तकलीफ को सदन के सामने बयां कर रहे थे, तो फिर आम आदमी पार्टी को इससे तकलीफ क्यों होने लगी...क्या किसी उद्योगपति को इससे नुकसान हो रहा था, जिसके कहने पर केजरीवाल ने राघव पर इतना बड़ा एक्शन लिया...सवाल ये है कि
एयरपोर्ट पर मिल रहे महंगे खाने का मुद्दा उठाने से केजरीवाल को क्यों तकलीफ हुई ?
जोमेटो-ब्लिंकिट के डिलीवरी राइडर्स की समस्या उठाने से AAP क्यों नाराज होने लगी ?
टोल प्लाजा लूट से लेकर बैंक चार्जेस लूट का मुद्दा उठाना AAP को रास क्यों नहीं आया ?
टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी, कंटेंट क्रिएटर्स पर स्ट्राइक और टैक्स बोझ का मुद्दा उठाना क्या गलत है.
ये सवाल राघव चड्ढा राज्यसभा में उपनेता के पद से हटाए जाने के बाद से आप से पूछ रहे हैं..अब आप सोचिए कि एयरपोर्ट पर कैफे किसका होता है, टेलीकॉम कंपनियां किसकी हैं, आम आदमी की तकलीफ का मुद्दा उठाने से परेशानी किसे होगी, उद्योगपतियों को...तो क्या उद्योगपतियों को बचाने के लिए केजरीवाल ने ये कदम किसी के कहने पर उठाया...क्योंकि केजरीवाल जो पहले खुद को आम आदमी कहते थे, उनका उठना-बैठना भी बड़े-बड़े उद्योगपतियों के साथ है, और उनकी पार्टी से भी कई बड़े बिजनेसमैन हैं...या फिर पार्टी के बाहर से आदेश आया...जिसका केजरीवाल ने पालन किया...राघव चड्ढा खुद इस फैसले से हैरान हैं और ये भी चेतावनी दे रहे हैं कि मेरी खामोशी को मेरी हार मत समझ लेना। मैं वो दरिया हूं, जो वक्त आने पर सैलाब बनता है...पर राघव की दलीलों से अलग आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता अनुराग ढांडा गंभीर आरोप लगाते हैं...वो पूछते हैं...
गुजरात में AAP के सैंकड़ों कार्यकर्ताओं को बीजेपी की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया, पर सांसद साहब सदन में कुछ नहीं बोले
पश्चिम बंगाल में वोट का अधिकार छीना जा रहा है, सदन में CEC के खिलाफ प्रस्ताव आया तो इन्होंने साइन करने से मना कर दिया.
जब पार्टी ने सदन से वॉकआउट किया तो मोदीजी की हाजिरी लगाने के लिए ये बैठे रहते हैं. ये मोदी के खिलाफ बोलने से घबराते हैं.
ये वो तीन वजह है जिसने आम आदमी पार्टी के मजबूत स्तंभ कहे जाने वाले राघव को अब आप से दूर कर दिया है...पर राजनीति में जो दिखता है वो होता नहीं है, और जो होता है उसका अंदेशा कभी-कभी पब्लिक नहीं लगा पाती...राघव को हटाकर जिस सांसद को आप ने राज्यसभा में उपनेता बनाया है, उनका नाम है अशोक मित्तल जो लवली यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर हैं....
करीब 91 करोड़ की संपत्ति के मालिक अशोक मित्तल ने केजरीवाल को अपना बंगला ऑफर किया था.
ये रक्षा समिति, वित्त समिति समेत कई कमेटी में रहे, ऑपरेशन सिंदूर के बाद डेलिगेट्स बनकर विदेश गए
मोदी के करीबी भी कहे जाते हैं, यानि दोनों तरफ से इनके रिश्ते काफी अच्छे रहे हैं.
शायद यही वजह है कि राज्यसभा में संतुलन बनाने के लिए केजरीवाल ने नया दांव खेला है...क्योंकि संजय सिंह एक तरफ अडाणी-अडाणी कर रहे हैं...तो दूसरी तरफ ये पार्टी से जुड़े मुद्दे उठा सकते हैं...फिलहाल राघव चड्ढा ने ये पत्ते नहीं खोले हैं कि वो बीजेपी में जाएंगे या कुछ और करेंगे...पर इतना जरूर कह रहे हैं कि सैलाब बनकर लौटूंगा, तो क्या कहानी बदलने वाली है...एक वक्त वो भी था जब राघव चड्ढा के सिर पर सदन के बाहर कौआ मंडरा रहा था, तो बीजेपी वालों ने कहा था झूठ बोले कौवा काटे, आज हकीकत में देख लिया...हालांकि सियासत में ऐसी बयानबाजियां चलती रहती हैं...तो एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर अगर आपसे पूछा जाए कि राघव चड्ढा को क्या करना चाहिए तो आपका जवाब क्या होगा, अपनी राय जरूर दें...