नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा में राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है. इस फैसले के एक दिन बाद शुक्रवार, 3 अप्रैल को राघव चड्ढा ने सुबह 10 बजे अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से एक वीडियो जारी किया. वीडियो में उन्होंने साफ कहा, “मुझे खामोश कर दिया गया है, लेकिन मैं हारा नहीं हूं.”
राघव चड्ढा ने वीडियो में क्या कहा?
Silenced, not defeated
— Raghav Chadha (@raghav_chadha) April 3, 2026
My message to the ‘aam aadmi’
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खामोश करवाया गया हूँ, हारा नहीं हूँ
'आम आदमी’ को मेरे संदेश pic.twitter.com/poUwxsu0S3
राघव चड्ढा ने आम आदमी और अपनी पार्टी दोनों को संबोधित करते हुए कहा कि जब भी उन्हें संसद में बोलने का अवसर मिलता है, तो वे आम लोगों की असली समस्याएं उठाते हैं. वे ऐसे मुद्दे उठाते हैं जिन पर संसद में आमतौर पर चर्चा नहीं होती. उन्होंने पूछा, “क्या जनता की समस्याओं को सदन में रखना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई गुनाह किया है?” राघव ने आगे बताया कि आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर सूचित कर दिया है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने का मौका न दिया जाए. उन्होंने कहा, “मुझे यह समझ नहीं आ रहा कि आखिर मुझे बोलने से क्यों रोका जा रहा है?”
किन मुद्दों को उन्होंने सदन में उठाया था?
राघव चड्ढा ने कुछ प्रमुख मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा, ''एयरपोर्ट पर महंगे खाने की समस्या, जोमैटो और ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म पर डिलीवरी राइडर्स की परेशानियां, खाने में मिलावट, टोल प्लाजा पर लूट, बैंक चार्जेस की मनमानी, कंटेंट क्रिएटर्स पर मिडिल क्लास का टैक्स का बोझ, टेलीकॉम कंपनियों द्वारा 12 महीने में 13 बार रिचार्ज कराने की मजबूरी, डेटा रोलओवर न देने और रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग बंद कर देने जैसी समस्याएं उठाना क्या गुनाह है.''
उन्होंने कहा कि इन मुद्दों को उठाने से आम आदमी पार्टी को फायदा ही हुआ है, फिर भी उन्हें बोलने से क्यों रोका जा रहा है? उनकी आवाज को दबाने की कोशिश क्यों की जा रही है? राघव चड्ढा ने अपने समर्थकों से आभार जताते हुए कहा, “आप सब मुझे असीम प्यार और समर्थन देते हैं. जब भी मैं आपके मुद्दे उठाता हूं, आप मुझे हौसला देते हैं. मैं आपका शुक्रिया अदा करना चाहता हूं.”
उन्होंने लोगों से अपील की, “कृपया मेरा हाथ थामे रखें, इसे मत छोड़ें. मैं आपके साथ हूं.” अंत में उन्होंने साफ संदेश दिया: “जिन लोगों ने आज मेरे संसद में बोलने के अधिकार को छीन लिया है और मुझे चुप करा दिया है, उनसे मैं एक बात कहना चाहता हूं- मेरी इस खामोशी को कभी हार मत समझिएगा.”