नई दिल्ली: संभल जिले की चंदौसी कोर्ट का आदेश पुलिसकर्मियों की धड़कनें बढ़ाने वाला है, अदालत ने उस वक्त के सीओ अनुज चौधरी और इंस्पेक्टर अनुज तोमर समेत 10-12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर का आदेश दिया है..जिसके बाद से लोग तीन बातें मूल रूप से जानना चाहते हैं, पहली- वो जज साहब कौन हैं, जिन्होंने ये आदेश दिया, दूसरी वो याचिका क्या थी, बिस्किट वाला मामला क्या है, जिस पर एफआईआर का आदेश हुआ और तीसरी संभल पुलिस अब क्या करेगी, तो सबसे पहले तीसरे सवाल का जवाब आपको बताते हैं...
संभल एसपी केके बिश्नोई के हवाले से न्यूज 18 लिखता है, ''ये ऑर्डर अवैध है, हम मुकदमा दर्ज नहीं करेंगे, इस मामले एक न्यायिक जांच पहले ही हो चुकी है. रिपोर्ट में पुलिस एक्शन को सही माना गया है. हम इस मामले में उचित फोरम पर अपील दाखिल करेंगे.'' पर जिस मामले में कोर्ट ने ये आदेश दिया है, वो मामला काफी संवेदनशील है...
खग्गूसराय के अंजुमन मोहल्ले के रहने वाले शिकायतकर्ता यामीन ने आरोप लगाया है कि 24 नवंबर को जामा मस्जिद सर्वे के दौरान भड़की हिंसा में उसके 24 साल के बेटे आलम को पुलिस की गोली लगी. यामीन ने कोर्ट को बताया कि उनका बेटा उस दिन बिस्किट बेचने के लिए घर से निकला था. गोली लगने के बाद परिवार ने डर की वजह से पुलिस से संपर्क नहीं किया और चुपके से इलाज करवाया.
यामीन ने 6 फरवरी 2025 को शिकायत दर्ज कराई, जिसमें तात्कालीन सीओ अनुज चौधरी, कोतवाली के तत्कालीन SHO अनुज तोमर और 10-12 अन्य पुलिसकर्मियों पर आरोप लगाया. चंदौसी की CJM कोर्ट ने 9 जनवरी 2026 को सुनवाई के बाद आदेश दिया कि इन सभी नामजद और अज्ञात पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज की जाए.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विभांशु सुधीर ने ये आदेश जारी किया, इनके बारे में जब हमने जानने की कोशिश की तो इलाहाबाद हाईकोर्ट डॉट इन पर पता चला ये भदोही के रहने वाले हैं, इनकी उम्र करीब 35 साल है और कई जगहों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं.
कौन हैं CJM विभांशु सुधीर?
साल 2013 में सुल्तानपुर जिले में ये पहली बार एडिशनल सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनाए गए
साल 2015 में सिविल जज मुसाफिरखाना-सुल्तानपुर में सिविल जज (जूनियर डिवीजन बनाए गए
उसके बाद एटा में ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बने, फिर मुरादाबाद, चंदौली, गाजियाबाद में भी सेवाएं दी
सितंबर 2025 में ये संभल के चंदौसी में चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट बनाए गए
अब पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर का आदेश देकर चर्चा में हैं, हालांकि ये पहली बार नहीं है जब किसी जज साहब ने इस तरीके का आदेश दिया है, बल्कि इससे पहले भी पुलिस की कार्रवाई पर अगर सवाल उठे तो सुनवाई के बाद कई अदालतों ने मुकदमे और जांच का आदेश दिया है....लेकिन यूपी में सिर्फ अदालत ही नहीं बल्कि विधानसभा अदालत के कटघरे में भी पुलिसकर्मी खड़े नजर आए हैं, जब यूपी विधानसभा में बकायदा पुलिसकर्मियों की पेशी भी हुई थी, तब उसकी तस्वीरें बेहद चर्चा में रहीं थीं...तब पता चला था कि 15 सितंबर, 2004 को कानपुर में बिजली कटौती के खिलाफ जिलाधिकारी (कानपुर नगर) को एक ज्ञापन सौंपने जा रहे तात्कालीन बीजेपी विधायक सलिल बिश्नोई के साथ पुलिसकर्मियों न गलत व्यवहार किया था.
उन्होंने विशेषाधिकार नोटिस दिया, जिसमें विधानसभा की अदालत ने सुनवाई के बाद 6 पुलिसकर्मियों को एक दिन की सजा सुनाई थी, जिसमें कानपुर नगर में बाबूपुरवा के तत्कालीन सीओ अब्दुल समद (अब सेवानिवृत्त), तत्कालीन एसएचओ किदवई नगर श्रीकांत शुक्ला, तत्कालीन उप निरीक्षक त्रिलोकी सिंह, कांस्टेबल छोटे सिंह, विनोद मिश्रा और मेहरबान सिंह शामिल रहे.